भुम्मा की हल्दी विदेशों तक पहुंची
जैविक खेती से किसान मटरूलाल डोंगरे की बड़ी सफलता
एक एकड़ से ढाई लाख तक कमाई, गांव के किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
By admin -23/02/2026
Report – th Ramkumar rajput
पांढुर्णा,(पंचायत दिशा समाचार ) मध्यप्रदेश के
पांढुर्णा जिलें के सौंसर विकासखंड के ग्राम भुम्मा के प्रगतिशील किसान मटरूलाल डोंगरे ने जैविक खेती के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है। उनकी उगाई हुई जैविक हल्दी अब ऑस्ट्रेलिया, पेरिस और जापान तक पहुंच रही है, जबकि स्थानीय बाजारों में यह हाथों-हाथ बिक रही है।
करीब 3 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले किसान मटरूलाल डोंगरे जैविक पद्धति से हल्दी, अदरक, मक्का, कपास, संतरा, टमाटर, गेहूं और चना की खेती करते हैं। आत्मनिर्भर खेती की दिशा में उन्होंने बायोगैस प्लांट, वर्मीकम्पोस्ट और एजोला टांके तैयार किए हैं, जिससे उन्हें जैविक खाद उपलब्ध होती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
आत्मा परियोजना के मार्गदर्शन में वे लगभग दो एकड़ क्षेत्र में जैविक हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं। हर वर्ष लगभग 10 क्विंटल कच्ची हल्दी प्राप्त होती है, जिसे वे स्वयं प्रोसेसिंग एवं पैकिंग कर “भुम्मा जैविक समिति” के नाम से बेचते हैं।
400 रुपये किलो बिक रही हल्दी
उनकी जैविक हल्दी 400 रुपये प्रति किलो की दर से पांढुर्णा और छिंदवाड़ा के जैविक हॉट बाजार, मेले एवं स्थानीय बाजारों में बिक रही है।
एक एकड़ से ढाई लाख तक मुनाफा
जिला प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से किसान को विपणन की सुविधा मिली है, जिससे एक एकड़ हल्दी से लगभग 2.5 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।
पुरस्कार से सम्मानित किसान
जैविक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए किसान मटरूलाल डोंगरे को आत्मा परियोजना के तहत विकासखंड स्तरीय कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। कृषि विज्ञान केंद्र सहित कई कार्यक्रमों में भी उन्हें सम्मान मिला है।
अब हल्दी का रकबा होगा दोगुना
बेहतर आमदनी को देखते हुए किसान ने अगले सीजन में हल्दी की खेती का रकबा दोगुना करने की योजना बनाई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी जैविक हल्दी की खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
“जैविक खेती से बदल रही गांव की तस्वीर“
भुम्मा की जैविक हल्दी आज पांढुर्णा जिले की पहचान बनती जा रही है और किसान मटरूलाल डोंगरे आत्मनिर्भर खेती की नई मिसाल बनकर उभरे हैं।







