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जन विश्वास अभियान में निलंबित शिक्षक के समर्थन में सड़क पर छात्र, स्कूल में तालाबंदी…!

जन विश्वास अभियान में निलंबित शिक्षक के समर्थन में सड़क पर छात्र, स्कूल में तालाबंदी
शिक्षक की वापसी की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं का धरना, स्कूल व्यवस्था पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा/छिंदी। जन विश्वास अभियान के दौरान बिना पूर्व सूचना पहुंचे शिक्षक राजेंद्र परतेती के निलंबन के बाद अब मामला नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। शिक्षक के समर्थन में स्कूल के छात्र-छात्राएं सड़क पर उतर आए और स्कूल के सामने धरने पर बैठकर नारेबाजी करते हुए निलंबन समाप्त कर शिक्षक को वापस स्कूल में पदस्थ करने की मांग की।


बताया जा रहा है कि जन विश्वास अभियान के दौरान संकुल केंद्र एवं विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचना दिए बिना शिक्षक राजेंद्र परतेती के छिंदी पहुंचने के मामले में कलेक्टर द्वारा निलंबन की कार्रवाई की गई थी। कार्रवाई के बाद अब विद्यार्थियों द्वारा शिक्षक की वापसी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


स्कूल से सड़क तक पहुंचा विरोध
शिक्षक के निलंबन के विरोध में छात्र-छात्राओं द्वारा स्कूल का बहिष्कार कर तालाबंदी किए जाने की बात सामने आई है। विद्यार्थी स्कूल के सामने धरने पर बैठे और शिक्षक राजेंद्र परतेती को पुनः स्कूल में लाने की मांग करते नजर आए।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छात्र-छात्राओं को शिक्षक के समर्थन में सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह विरोध विद्यार्थियों का स्वतःस्फूर्त निर्णय था या इसके पीछे किसी का प्रभाव था? इन सवालों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल
घटनाक्रम के दौरान स्कूल में तालाबंदी और विद्यार्थियों के धरने पर बैठने की स्थिति ने स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल छोड़कर सड़क पर धरने पर बैठे, तो क्या स्कूल के शिक्षकों और प्राचार्य को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो विद्यार्थियों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए क्या प्रयास किए गए?


यह भी जांच का विषय है कि विद्यार्थियों द्वारा किए गए विरोध की सूचना संबंधित अधिकारियों को समय पर दी गई थी या नहीं।
नाबालिग विद्यार्थियों को विभागीय विवाद से दूर रखना जरूरी..!
शिक्षक के निलंबन को लेकर विभागीय कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन यदि विद्यार्थी वास्तव में अपनी इच्छा से शिक्षक की वापसी की मांग कर रहे हैं तो उनकी बात भी प्रशासन को गंभीरता से सुननी चाहिए। वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी शिक्षक अथवा अन्य व्यक्ति ने विद्यार्थियों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।


नाबालिग छात्र-छात्राओं को किसी भी विभागीय या प्रशासनिक विवाद का हिस्सा बनाना गंभीर विषय है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पुलिस विभाग भी घटनास्थल पर…

छात्रों के धरने पर बैठने की सूचना पर तामिया टी आई और पुलिस बल घटना स्थल पहुंचे और थाना प्रभारी के समझाने के बाद छात्र-छात्राएं स्कूल की कक्षाएं में गए।

तामिया विकासखंड शिक्षा अधिकारी से दूरभाष से सम्पर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया ।इस कारण इस मामले में कोई बात नहीं हो पाई ।

अब देखना यह है कि कलेक्टर और जनजातीय कार्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और यह स्पष्ट करने के लिए जांच कराते हैं या नहीं कि विद्यार्थियों का विरोध स्वतःस्फूर्त था अथवा इसके पीछे किसी का प्रभाव था।
रिपोर्ट : रामकुमार राजपूत छिंदवाड़ा