गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम को घर-घर तक पहुंचाया,
चौरई में 60वां तुलसीदास जयंती समारोह, भव्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
छिंदवाड़ा/चौरई। चौरई नगर में आयोजित 60वां तुलसीदास जयंती समारोह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का भव्य संगम बन गया। छह दशक से चली आ रही यह परंपरा चौरई की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न मंडलों के सदस्यों ने सहभागिता की।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने वाल्मीकि रामायण की कथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आम जनमानस की भाषा में श्रीरामचरितमानस की रचना की। रामचरितमानस के माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को घर-घर तक पहुंचाया। आज भी मानस का पाठ लोगों को भगवान श्रीराम के युग से जोड़ने का माध्यम बना हुआ है।
समारोह में सांसद बंटी विवेक साहू, चौरई विधायक सुजीत चौधरी, पूर्व विधायक पं. रमेश दुबे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर भगवान श्रीराम और गोस्वामी तुलसीदास के प्रति श्रद्धा अर्पित की। जनप्रतिनिधियों ने तुलसीदास जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी परंपरा, संस्कृति और धर्म से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोभायात्रा में गूंजे श्रीराम के जयकारे
आयोजन के दौरान चौरई नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सांसद बंटी विवेक साहू, विधायक सुजीत चौधरी, पूर्व विधायक रमेश दुबे सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान भगवान श्रीराम और गोस्वामी तुलसीदास के जयकारों से पूरा नगर भक्तिमय नजर आया।

समारोह में महिला जस प्रतियोगिता और पुरुष जस प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। दोनों प्रतियोगिताओं में करीब 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। महिला मंडलों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। इसके साथ ही पुरुष जस गायन, धार्मिक झांकियां, शैला नृत्य और प्रदेश स्तरीय मानस पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

विभिन्न मंडलों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियों ने समारोह की भव्यता बढ़ाई, वहीं शैला नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों में उत्साह भर दिया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं मंडलों को आयोजन समिति की ओर से पुरस्कृत किया गया।

छह दशक से कायम है परंपरा
आयोजन समिति के अनुसार तुलसीदास जयंती समारोह की 60 वर्षों से चली आ रही परंपरा चौरई की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। सावन माह में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस समारोह में चौरई सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल होते हैं। समिति का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने के लिए इस आयोजन को निरंतर भव्य स्वरूप दिया जाता रहेगा।








