छोटी छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी, 110 सीटर कन्या शिक्षा परिसर की अधीक्षिका निलंबित…
छात्रावास की बच्चों के के बहला फुसलाकर धरना करना पड़ा महंगा जांच करने के बाद सहायक आयुक्त ने किया निलंबित …
छिंदवाड़ा आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर में छात्राओं के विरोध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद आखिरकार जनजातीय कार्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर (जनजातीय कार्य विभाग), जिला छिंदवाड़ा द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी आदेश में 110 सीटर कन्या शिक्षा परिसर की प्रभारी अधीक्षिका एवं प्राथमिक शिक्षिका श्रीमती अनिता दाहिया को निलंबित कर दिया गया है।
मामला 14 अगस्त को सामने आया था, जब कन्या शिक्षा परिसर की छात्राओं से जुड़ी घटना को लेकर शिकायत और पुलिस कार्रवाई की स्थिति बनी। शिकायत में छात्राओं द्वारा अधीक्षिका के पद पर प्रभारी रहने के दौरान कथित रूप से मनमानी एवं सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की।
सत्येंद्र सिंह मरकाम सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
कलेक्टर कार्यालय के आदेश में उल्लेख है कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अधीक्षिका के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बताया गया है। आदेश के अनुसार अधीक्षिका द्वारा आश्रम में निवासरत नाबालिग छात्राओं को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के परिसर से बाहर जाने देने की बात सामने आई। विभाग ने इसे छात्राओं की सुरक्षा एवं अभिरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही माना।
आदेश में यह भी उल्लेखित है कि इस प्रकार की लापरवाही से छात्राओं की सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है तथा आश्रम की नियमावली एवं अनुशासन का उल्लंघन प्रदर्शित होता है।
श्रीमती अनीता दहिया अधीक्षक कान्या शिक्षा परिसर छिंदवाड़ा
‘नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा’ पर विभाग ने माना गंभीर मामला
सबसे गंभीर बात यह है कि मामला आदिवासी समाज की नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ा है। सरकारी आवासीय परिसर में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित अधीक्षक और संस्था प्रबंधन की होती है। ऐसे में बिना सक्षम अनुमति छात्राओं को परिसर से बाहर जाने देने को विभाग ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में माना है।
आदेश में कहा गया है कि संबंधित कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1)(दो) के विपरीत होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है।
निलंबन के दौरान हरई रहेगा मुख्यालय
कलेक्टर के आदेश के अनुसार श्रीमती अनिता दाहिया को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (2) में दिए प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, हरई कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।

अब उठे बड़े सवाल—जिम्मेदारी तय होगी या सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगी कार्रवाई?
इस कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि कन्या शिक्षा परिसर में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था में आखिर ऐसी स्थिति बनी कैसे? क्या परिसर में निगरानी और अनुशासन व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी? क्या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया था? और यदि छात्राओं की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आई है तो इसके लिए केवल प्रभारी अधीक्षिका ही जिम्मेदार हैं या निगरानी तंत्र की भी जवाबदेही तय होगी?
फिलहाल कलेक्टर के आदेश से एक बात साफ है कि आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर की नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा में लापरवाही को विभाग ने गंभीरता से लिया है। अब देखना होगा कि आगे की विभागीय जांच में क्या और तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी का दायरा कहां तक तय होता








