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अटैचमेंट के फेर में स्कूल का बाबू, तहसील में बरसों से ड्यूटीतुमडागढ़ी स्कूल में बाबू का पद खाली, सरकारी कामकाज प्रभावित होने के आरोप—जनजातीय विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

अटैचमेंट के फेर में स्कूल का बाबू, तहसील में बरसों से ड्यूटी
तुमडागढ़ी स्कूल में बाबू का पद खाली, सरकारी कामकाज प्रभावित होने के आरोप—जनजातीय विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा/बिछुआ। जनजातीय कार्य विभाग में कर्मचारियों के अटैचमेंट को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिछुआ विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुमडागढ़ी में पदस्थ बाबू वासुदेव छेरके के लंबे समय से तहसील कार्यालय में अटैचमेंट पर कार्य करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्षों से चल रहे इस अटैचमेंट के कारण मूल विद्यालय में लिपिकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं और स्कूल का सरकारी कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है।


जिले में बिछुआ एक अलग विकासखंड के रूप में प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस कर्मचारी की पदस्थापना विद्यालय में है, यदि वह लंबे समय से दूसरे कार्यालय में सेवाएं दे रहा है, तो उसके मूल पद का काम कौन संभाल रहा है?
स्कूल में बाबू नहीं, तहसील में अटैचमेंट बरकरार!
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वासुदेव छेरके का अटैचमेंट वर्षों वर्ष 2013 से समाप्त नहीं किया गया है। इससे विद्यालय में कार्यालयीन कार्य, दस्तावेजों का संधारण, पत्राचार सहित अन्य लिपिकीय जिम्मेदारियां प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि तहसील कार्यालय में कर्मचारी की आवश्यकता है, तो क्या विभागीय स्तर पर उसका नियमानुसार स्थानांतरण या पदस्थापन नहीं किया जा सकता? और यदि अटैचमेंट अस्थायी व्यवस्था थी, तो वह वर्षों तक क्यों जारी है?


सहायक आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल
मामले ने जनजातीय कार्य विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के पास कर्मचारियों की पदस्थापना और अटैचमेंट की समीक्षा करने की व्यवस्था होने के बावजूद यदि किसी कर्मचारी का अटैचमेंट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जनजातीय कार्य विभाग के लिए अलग RTI व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिससे विभागीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक निर्णयों से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


कब टूटेगा अटैचमेंट का यह खेल?
शिक्षा व्यवस्था में एक-एक कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी विद्यालय का कर्मचारी लंबे समय तक मूल संस्था से बाहर अटैच रहता है, तो इसका सीधा असर विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग अटैचमेंट व्यवस्था की समीक्षा कर वासुदेव छेरके को उनके मूल पदस्थापन स्थल पर वापस भेजता है या वर्षों से चली आ रही व्यवस्था यूं ही जारी रहती है।
विभागीय अधिकारियों से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अटैचमेंट आदेश, उसकी अवधि और अब तक के विस्तार की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा यदि नियम विरुद्ध अटैचमेंट पाया जाता है तो तत्काल समाप्त कर जिम्मेदारी तय की जाए।