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67 लाख का बास्केटबॉल ग्राउंड पहली बारिश में बेहाल!तामिया आवासीय खेल परिसर में निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 18 लाख की बाउंड्रीवॉल भी ढही..

67 लाख का बास्केटबॉल ग्राउंड पहली बारिश में बेहाल!
तामिया आवासीय खेल परिसर में निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 18 लाख की बाउंड्रीवॉल भी ढही
आदिवासी बच्चों के खेल के सपनों पर भ्रष्टाचार का साया? विभागीय इंजीनियर की निगरानी में हुए काम की जांच की उठी मांग
बिशेष रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284

छिंदवाड़ा/तामिया। आदिवासी बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलों में आगे बढ़ाने के लिए सरकार लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन तामिया के आवासीय खेल परिसर में इन सरकारी दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। सूत्रों की जानकारी के अनुसार करीब 67 लाख रुपये की लागत से तैयार बास्केटबॉल ग्राउंड पहली ही बारिश में खराब होने लगा, वहीं परिसर में कुछ माह पहले बनाई गई करीब 18 लाख रुपये की बाउंड्रीवॉल भी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी और धराशायी हो गई।
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद निर्माण कार्य का इतनी जल्दी खराब होना अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह भी है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब विभागीय इंजीनियरों ने इसकी गुणवत्ता की निगरानी कैसे की? निर्माण पूरा होने के बाद भुगतान से पहले क्या तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन कराया गया था?
पहली बारिश ने खोल दी निर्माण की पोल!


तामिया आवासीय खेल परिसर में तैयार बास्केटबॉल ग्राउंड को देखकर अब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण था तो एक साल भी पूरा होने से पहले मैदान की हालत खराब होने की नौबत क्यों आई?
सरकारी राशि से तैयार यह मैदान आदिवासी विद्यार्थियों के लिए खेल प्रतिभा निखारने का माध्यम बनना था, लेकिन निर्माण की स्थिति देखकर अब यही सवाल उठ रहा है कि कहीं कमजोर निर्माण के कारण बच्चों के लिए बनाई गई सुविधा ही परेशानी का कारण तो नहीं बन रही?


18 लाख की बाउंड्रीवॉल भी नहीं टिक सकी
इसी खेल परिसर में करीब 18 लाख रुपये की लागत से बनाई गई बाउंड्रीवॉल के गिरने ने पूरे निर्माण कार्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। आरोप है कि बाउंड्रीवॉल के निर्माण में कॉलम के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रखी गई और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं थी।
यदि ये आरोप सही हैं तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि निर्माण की निगरानी करने वाले विभागीय इंजीनियर ने मौके पर क्या जांच की? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच की गई या फिर कागजों पर ही सब कुछ दुरुस्त मान लिया गया?
इंजीनियर-ठेकेदार की भूमिका की हो जांच

मामले में विभागीय इंजीनियर और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता से समझौता हुआ तो इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
अब मांग है कि बास्केटबॉल ग्राउंड और बाउंड्रीवॉल का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए। निर्माण की स्वीकृत राशि, एस्टीमेट, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, उपयोग की गई सामग्री और किए गए भुगतान की भी जांच हो।
सवालों के घेरे में लाखों का निर्माण
सरकार आदिवासी बच्चों के भविष्य और उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए पैसा खर्च कर रही है। ऐसे में यदि लाखों रुपये खर्च करने के बाद तैयार सुविधाएं पहली बारिश में ही जवाब देने लगें तो यह केवल निर्माण की खराब गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।
अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में मौके का निरीक्षण कर जिम्मेदारी तय करते हैं या फिर लाखों रुपये की लागत से हुए निर्माण की खामियों को मरम्मत के नाम पर दबा दिया जाता है।

टीप- अगली खबर में देखें आवासीय खेल परिसर तामिया में वर्ष 2024 में अधीक्षक के खाते में डाले गए 50 लाख ,आखिर कहां गई राशि कहा हुआ निर्माण , क्या कागजों में ही अधीक्षक ने कर पूरा निर्माण,पूरी खबर अगले एपिसोड में