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छात्रसंघ चुनाव के हाईकोर्ट के निर्देश का NSUI ने किया स्वागतअपेक्षा सूर्यवंशी बोलीं—प्रत्यक्ष प्रणाली से हों चुनाव, हर छात्र को मिले नेतृत्व चुनने का अधिकार

छात्रसंघ चुनाव के हाईकोर्ट के निर्देश का NSUI ने किया स्वागत
अपेक्षा सूर्यवंशी बोलीं—प्रत्यक्ष प्रणाली से हों चुनाव, हर छात्र को मिले नेतृत्व चुनने का अधिकार

रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश का कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने स्वागत किया है। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अपेक्षा सूर्यवंशी ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक छात्रसंघ चुनाव कराने के संबंध में दिए गए निर्देश प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं की लोकतांत्रिक आवाज की जीत हैं।
एनएसयूआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश एनएसयूआई की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। संगठन ने इसे छात्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला निर्णय बताया है।


प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग
अपेक्षा सूर्यवंशी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने चाहिए, ताकि प्रत्येक नियमित विद्यार्थी अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और सहसचिव का सीधे चुनाव कर सके। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव से विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ती है, जबकि अप्रत्यक्ष प्रणाली में विद्यार्थी पहले कक्षा प्रतिनिधि चुनते हैं और बाद में निर्वाचित प्रतिनिधि छात्रसंघ के पदाधिकारियों का चुनाव करते हैं।
उन्होंने कहा कि एनएसयूआई की स्पष्ट मांग है कि प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाएं, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी का मत सीधे छात्र नेतृत्व के चयन में प्रभावी हो।
छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला’
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष ने कहा कि लगभग एक दशक से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक सहभागिता को नुकसान पहुंचा है। छात्रसंघ को लोकतंत्र की पहली पाठशाला बताते हुए उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश को कई बड़े नेता छात्र राजनीति से मिले हैं।
उन्होंने छात्र नेताओं और विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के निर्णय की बधाई देते हुए इसे छात्र शक्ति की जीत बताया। साथ ही सभी छात्र संगठनों और छात्र नेताओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।
शिक्षकों की विचारधारा पर भी उठाए सवाल
अपेक्षा सूर्यवंशी ने आरोप लगाया कि एनएसयूआई की लड़ाई केवल छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऐसे शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की भूमिका का भी विरोध करता है, जो कथित रूप से एबीवीपी या आरएसएस से जुड़े हैं अथवा उनकी विचारधारा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “एनएसयूआई की लड़ाई 70 प्रतिशत से अधिक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बैठे ऐसे शिक्षकों एवं प्राध्यापकों से है।” उन्होंने मांग की कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक निष्पक्षता और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।
सरकार से समय पर चुनाव कराने की मांग
एनएसयूआई ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए निर्धारित समय सीमा में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति में विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।