छिंदवाड़ा में शिक्षा के मंदिर पर गंभीर सवाल!
छठवीं कक्षा के बच्चों से कथित आपत्तिजनक संवाद और धमकी के आरोप, शिक्षिका निलंबित
पालकों की शिकायत के बाद विभागीय कार्रवाई, शिक्षिका ने आरोपों को बताया साजिश; निष्पक्ष जांच की मांग
विशेष रिपोर्ट | रामकुमार राजपूत | छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में यदि बच्चों के सामने शिक्षक की भाषा और व्यवहार ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसा ही एक मामला छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर कुंडाली कलां स्थित पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से सामने आया है।
विद्यालय की छठवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं और पालकों की शिकायत के अनुसार, विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका भावना शर्मा पर बच्चों से कथित तौर पर आपत्तिजनक और उम्र के अनुरूप न होने वाली बातें करने तथा धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।
दिनेश शर्मा प्राचार्य
बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायत में बच्चों द्वारा शिक्षिका पर कथित रूप से निजी रिश्तों और डेटिंग से संबंधित बातें करने के आरोप लगाए गए हैं। बच्चों के अनुसार, शिक्षिका द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे अभिभावकों ने बच्चों की उम्र और स्कूल के वातावरण के लिहाज से गंभीर बताया है।
सबसे गंभीर आरोप कथित धमकी को लेकर है। शिकायत के मुताबिक शिक्षिका ने बच्चों के सामने स्वयं को कई हत्याओं से जोड़ते हुए कार्रवाई से बचने और बच्चों को नुकसान पहुंचाने जैसी कथित बातें कहीं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और शिक्षिका ने स्वयं इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है।
पालकों ने प्राचार्य के सामने उठाई आवाज
मामला सामने आने के बाद पालक संघ के पदाधिकारियों और बच्चों ने विद्यालय के प्राचार्य के समक्ष शिकायत रखी। बताया गया कि प्राचार्य ने बच्चों से जानकारी ली और लिखित शिकायत भी प्राप्त की। इसके बाद मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा शिक्षिका को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पहले भी शिकायतों की चर्चा
बताया जा रहा है कि शिक्षिका के विरुद्ध पूर्व में भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। वहीं निलंबन आदेश लेने से इनकार किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और पूर्व शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना अभी बाकी है।
शिक्षिका ने बताया साजिश
दूसरी ओर शिक्षिका भावना शर्मा ने बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए इसे उनके खिलाफ रची गई साजिश बताया है। उनका आरोप है कि बच्चों को बहला-फुसलाकर उनके खिलाफ बयान दिलवाए जा रहे हैं।
अब निष्पक्ष जांच सबसे जरूरी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि आखिर वास्तविकता क्या है? यदि बच्चों द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो स्कूल में इस तरह के कथित व्यवहार की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई होना जरूरी है। वहीं यदि आरोप गलत हैं, तो शिक्षिका को भी निष्पक्ष जांच के जरिए अपनी बात साबित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
चूंकि मामला नाबालिग छात्र-छात्राओं से जुड़ा है, इसलिए विभागीय जांच निष्पक्ष, संवेदनशील और तथ्यों के आधार पर होना बेहद जरूरी है। साथ ही बच्चों की पहचान और निजता की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब निगाह शिक्षा विभाग की जांच पर है कि इस पूरे मामले में सामने आए आरोपों की सच्चाई क्या निकलती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।








