Home CITY NEWS छिंदवाड़ा में पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक आखिर क्यों नहीं हो रही?

छिंदवाड़ा में पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक आखिर क्यों नहीं हो रही?

पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक आखिर क्यों नहीं हो रही?

जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पत्रकारों में नाराजगी

छिंदवाड़ा। प्रेस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक की व्यवस्था होने के बावजूद छिंदवाड़ा में नियमित बैठक नहीं होने को लेकर पत्रकारों में असंतोष देखने को मिल रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण बैठक नियमित रूप से क्यों नहीं बुलाई जा रही है?

पत्रकारों का कहना है कि त्रैमासिक बैठक केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। बैठक में जिले की प्रमुख समस्याओं, शासकीय योजनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों और पत्रकारों को फील्ड में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर अधिकारियों के साथ सीधे चर्चा की जा सकती है।

संवाद का मंच नहीं, तो समस्याएं कैसे पहुंचेंगी?

पत्रकारों के अनुसार नियमित बैठक नहीं होने से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिकारियों के साथ सामूहिक चर्चा का अवसर नहीं मिल पा रहा है। वहीं, नए पत्रकारों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले मीडिया कर्मियों की समस्याएं भी संबंधित अधिकारियों तक व्यवस्थित तरीके से नहीं पहुंच पातीं।

जनसंपर्क विभाग की भूमिका पर भी सवाल

जनसंपर्क विभाग को शासन और मीडिया के बीच सेतु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है। ऐसे में पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक समय पर नहीं होने को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि यदि बैठक आयोजित करने में कोई प्रशासनिक या अन्य कारण बाधा बन रहा है तो विभाग को उसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी चाहिए।

पत्रकारों का सवाल—बैठक नहीं होने की वजह क्या?

पत्रकारों के बीच अब यह सवाल चर्चा में है कि त्रैमासिक बैठक की निर्धारित प्रक्रिया क्या है, पिछली बैठक कब आयोजित हुई थी और आगामी बैठक कब प्रस्तावित है? साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बैठक नियमित रूप से आयोजित नहीं होने का कारण क्या है।

पत्रकारों ने मांग की है कि जनसंपर्क विभाग इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे और पत्रकारों की त्रैमासिक बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाए, ताकि प्रेस और प्रशासन के बीच संवाद और समन्वय प्रभावी बना रहे।

विभाग का पक्ष: इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी/संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।