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मीडिया पर रोक नहीं, नियमों का पालन जरूरी स्कूल-हॉस्टल कवरेज को लेकर सच्चाई..

मीडिया पर रोक नहीं, नियमों का पालन जरूरी — स्कूल-हॉस्टल कवरेज को लेकर सच्चाई
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार ) मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जनजातीय कार्य विभाग ने सभी छात्रावास अधीक्षक को व्हाट्सएप में एक मैसेज डाला गया है। कि अब मीडिया बिना अनुमति के कोई भी छात्रावास और स्कूलों में प्रवेश नही कर सकते है इसके लेकर भले ही विवाद की स्थिति बनी हो, लेकिन कानून और बाल संरक्षण से जुड़े नियमों को देखें तो स्कूल और हॉस्टल परिसर में पत्रकारों के प्रवेश पर पहले से ही स्पष्ट नियम लागू हैं।
बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार किसी भी पत्रकार या मीडिया प्रतिनिधि को स्कूल या छात्रावास में प्रवेश से पहले संस्था प्रमुख से मौखिक एवं लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति प्रवेश को अवैध माना जा सकता है। पत्रकारों को मान्यता प्राप्त प्रेस कार्ड दिखाना और गेट रजिस्टर में एंट्री करना भी जरूरी होता है।
सबसे महत्वपूर्ण नियम बच्चों की गोपनीयता की सुरक्षा से जुड़ा है। अभिभावक या संस्था की अनुमति के बिना बच्चों की फोटो, वीडियो या इंटरव्यू लेना नियमों के खिलाफ माना जाता है। संवेदनशील मामलों में बच्चों की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध हो सकता है।
संवेदनशील मामलों में और सख्ती
यौन अपराध या उत्पीड़न जैसे मामलों में मीडिया कवरेज पर विशेष सावधानी बरतनी होती है। बच्चों की पहचान उजागर करना कानून के तहत दंडनीय है।
हॉस्टल परिसर में अतिरिक्त प्रतिबंध
छात्रावास बच्चों का आवासीय क्षेत्र होने के कारण वहां प्रवेश के लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है। इसलिए बिना अनुमति पत्रकारों का प्रवेश नियम विरुद्ध माना जा सकता है।

बिना अनुमति प्रवेश पर हो सकती है कार्रवाई

अवैध प्रवेश का मामला दर्ज हो सकता है

स्कूल प्रबंधन पुलिस में शिकायत कर सकता है
अवैध रूप से बनाए गए फोटो-वीडियो जब्त किए जा सकते हैं

बड़ा सवाल फिर भी कायम…

हालांकि नियम बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि इन नियमों की आड़ में पारदर्शिता प्रभावित न हो। छात्रावासों और स्कूलों की व्यवस्था की निगरानी में मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

स्कूल और छात्रावासों में मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अनुमति और नियमों का पालन अनिवार्य है। बच्चों की सुरक्षा और पारदर्शिता — दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।

जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया…

जब इस विषय में जब जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त से बात की गई तो उनका कहना है कि जिले में इन दिनों छात्रावास अधीक्षक से शिकायत मिल रही थी। कि प्रतिदिन कोई ना कोई मीडिया प्रतिनिधि बताकर छात्रावास में आ जाते हैं और बिना पूछे पूरे छात्रावास में बच्चों के कमरे में जाकर वीडियो एवं फोटो बनाते हैं और बाद में परेशान करते है। ऐसी शिकायत मिल रही थी जिसें देखते हुए ऐसे आदेश दियें गयें है। जिससे छात्रावास एवं आश्रम शाला में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई एवं अन्य कार्य प्रभावित ना हो,यदि कोई मीडिया प्रतिनिधि छात्रावास एवं आश्रम शाला में जाता है तो उसे बाकायदा परमिशन लेना होगा। क्योंकि नियम है कि बिना परमिशन के हॉस्टल में प्रवेश नहीं कर सकते और किसी भी नाबालिक बच्चों की फोटो एंव वीडियो बिना अनुमति बनाना कानूनन अपराध है। यदि अब कोई भी मीडिया प्रतिनिधि ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सहायक आयुक्त का कहना है कि हम किसी भी मीडिया प्रतिनिधि को रोक नहीं रहे है लेकिन मीडिया प्रतिनिधि को नियमों का पालन करना जरूरी है

सतेंद्र सिहं मरकाम

सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा