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छात्रावास में अत्याचार या लापरवाही?सातवीं की छात्रा ने फांसी लगाने किया प्रयास..?

छात्रावास में अत्याचार या लापरवाही?
सातवीं की छात्रा ने फांसी लगाने का किया प्रयास,
…?

अधीक्षक पर गंभीर आरोप…

छिदंवाडा( पंचायत दिशा समाचार ) अनुसूचित जाति विभाग द्वारा संचालित न्यूटन स्थित अनुसूचित जाति कन्या जूनियर छात्रावास एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। छात्रावास में रह रही कक्षा सातवीं की एक छात्रा ने कथित रूप से प्रताड़ना से तंग आकर दुपट्टे से फांसी लगाने और हाथ की नस काटने का प्रयास किया। समय रहते साथी छात्राओं ने देख लिया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई।

छात्रावास की व्यवस्था पर गंभीर सवाल….?

घटना ने छात्रावास की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि छात्रावास अधीक्षक द्वारा मारपीट और प्रताड़ना किए जाने के कारण उनकी बेटी मानसिक रूप से परेशान थी और उसी के चलते उसने यह खतरनाक कदम उठाया। परिजनों ने मामले की शिकायत एसडीएम परासिया से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मारपीट और काम करवाने के आरोप…?

छात्रा ने परिजनों को बताया कि छात्रावास अधीक्षक उससे अपने निजी कमरे का झाड़ू-पोछा करवाती थी और खाना बनाने जैसे काम भी कराती थी। बताया जा रहा है कि छात्रा ने कुछ पापड़ तलकर खा लिए थे, जिस पर अधीक्षक ने उसे कथित रूप से पीटा। इसके बाद छात्रा काफी परेशान रहने लगी और उसने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल…

स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यूटन स्थित कन्या छात्रावास लंबे समय से विवादों के घेरे में है। छात्राओं से मारपीट, निजी काम करवाने और दुर्व्यवहार की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

छात्रा द्वारा उठाए गए इस खतरनाक कदम ने विभागीय व्यवस्था की पोल खोल दी….

अब छात्रा द्वारा उठाए गए इस खतरनाक कदम ने विभागीय व्यवस्था की पोल खोल दी है और छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अधीक्षिका ने अपना बचाव करते हुए क्या कहा..

वहीं छात्रावास अधीक्षक का कहना है कि 14 फरवरी को छात्रा के परिजन उसे महादेव मेला ले गए थे। वापस आने के बाद से उसका व्यवहार असामान्य था। और बच्ची अजीबो गरीब हरकत कर रही थी,अधीक्षिका के अनुसार परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उसके बाद हमारे द्वारा उसे उसके परिजनों के गांव पहुंचा दिया गया था। जिसकी सूचना जनजाति कार्य विभाग के क्षेत्र संयोजक को दे दी गई थी… लेकिन उसके परिवार वाले अब गलत शिकायत कर रहे है..

जांच की मांग…

परिजनों ने एसडीएम परासिया को शिकायत देकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा और अनुसूचित जाति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग ने बताया…

जब इस पूरे मामले पर सहायक आयुक्त श्री सत्येंद्र मरकाम से बात की गई तो उनका कहना है की शिकायत मिली है जिसकी टीम बनाकर जांच कराई जा रही है जांच में जो भी दोषी होगा उसे पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी फिलहाल अभी जांच चल रही है..

सबसे बड़ा सवाल यह है
कि अगर छात्राएं छात्रावास में सुरक्षित नहीं हैं तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?