भाजपा नेता अमित सक्सेना को अनुशासनहीनता का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब..
_सूखाग्रस्त घोषित करने, डूब क्षेत्र को चार गुना मुआवजा समेत विभिन्न मांगों पर सक्रियता;
13 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट घेराव की चर्चा पर संगठन सख्त..
छिंदवाड़ा।जिले में भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना की ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती सक्रियता अब पार्टी संगठन के निशाने पर आ गई है। भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव ने सक्सेना को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
संगठन की ओर से जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि सक्सेना किसानों और आम जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर दौरा कार्यक्रम कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। संगठन की जानकारी के बिना किए जा रहे इन कार्यक्रमों को पार्टी की रीति-नीति के विपरीत बताया गया है।

नोटिस में न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना, जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, डूब क्षेत्र के किसानों को चार गुना मुआवजा देने तथा अवैध रेत परिवहन में लगे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई नहीं किए जाने जैसी मांगों का उल्लेख किया गया है। संगठन ने अमित सक्सेना से आगामी दौरा कार्यक्रम तत्काल निरस्त करने और सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
कांग्रेस से भाजपा में आए थे अमित सक्सेना
अमित सक्सेना कभी जिले में कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। भाजपा में आने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही थी, लेकिन अब किसानों और ग्रामीणों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके लगातार दौरे ने जिले की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि संगठन के नोटिस के बाद अमित सक्सेना अपना रुख बदलते हैं या जनहित के मुद्दों पर अपनी मुहिम जारी रखते हैं।
किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी!
छिंदवाड़ा। अमित सक्सेना पिछले कुछ समय से ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके दौरे तथा सरकार के खिलाफ मुखर रुख ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
चर्चा है कि 13 अक्टूबर को किसानों और ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव किया जा सकता है। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
यदि यह आंदोलन होता है, तो भाजपा के भीतर इन मुद्दों को लेकर असहजता और बढ़ सकती है। अमित सक्सेना की सक्रियता को लेकर संगठन की नाराजगी अब नोटिस के रूप में सामने आई है। ऐसे में सभी की नजर उनके जवाब और आगामी राजनीतिक कदमों पर टिकी है।
नोट:ये मामला अभी संगठन के नोटिस तक सीमित है, कोई निष्कासन/कार्रवाई नहीं हुई है। पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।








