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माचागोरा जलाशय से इस बार सिर्फ 75 दिन मिलेगा पानी ,कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता

माचागोरा जलाशय से इस बार सिर्फ 75 दिन मिलेगा पानी
कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, जल संसाधन विभाग ने कम पानी वाली फसलें बोने की अपील की

छिंदवाड़ा/चौरई। कम वर्षा के चलते इस वर्ष माचागोरा जलाशय के पूर्ण भराव की स्थिति नहीं बन सकी है। इसका सीधा असर आगामी रबी सीजन की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है। जल संसाधन विभाग ने छिंदवाड़ा और सिवनी जिले के किसानों से पानी का उपयोग बेहद सावधानी से करने तथा फसल चयन में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

पेच व्यपवर्तन बांध जल संसाधन संभाग क्रमांक-1, चौरई के कार्यपालन यंत्री जे.के. मर्सकोले के अनुसार जलाशय में सीमित जल उपलब्धता के कारण इस वर्ष सिंचाई के लिए पानी भी सीमित रहेगा। विभाग के अनुसार किसानों को एक पलेवा और दो पानी उपलब्ध कराने की योजना है तथा नहरों का संचालन करीब 75 दिनों तक किया जाएगा।

किसान फसल बोने से पहले पानी का हिसाब रखें

जल संसाधन विभाग ने किसानों से कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने की अपील की है। विभाग ने चना, सरसों, अलसी और मटर जैसी फसलों की बुवाई को उपयुक्त बताया है। वहीं अधिक पानी की जरूरत वाली हाइब्रिड गेहूं, गन्ना और मक्का जैसी फसलों की बुवाई से बचने की सलाह दी गई है।

75 दिन की सिंचाई व्यवस्था, ज्यादा पानी वाली फसल बनी तो संकट

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसान अपनी इच्छा से अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसल की बुवाई करते हैं, तो निर्धारित सिंचाई व्यवस्था से अधिक पानी उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी नहीं होगी। ऐसे में किसानों को फसल बोने से पहले उपलब्ध सिंचाई पानी और फसल की पानी की जरूरत का आकलन करने की सलाह दी गई है।

छिंदवाड़ा-सिवनी के किसानों के लिए जल प्रबंधन की चुनौती

माचागोरा जलाशय पर निर्भर किसानों के लिए इस वर्ष सीमित सिंचाई अवधि चुनौती बन सकती है। विभाग की अपील के बाद अब किसानों के सामने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों का चयन करने की जरूरत है। जलाशय में उपलब्ध सीमित पानी को देखते हुए विभाग ने जल संरक्षण और सिंचाई के संतुलित उपयोग पर जोर दिया है।

विभाग की अपील: किसान पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही फसल का चयन करें और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।