सालों से छात्रावासों पर जमे अधीक्षकों पर गिरी तबादले की गाज!
जनजातीय कार्य विभाग ने कसा शिकंजा, अब नियमों की कसौटी पर खरे नहीं उतरने वालों को लौटना होगा मूल शाला
छिंदवाड़ा में बड़ी संख्या में अधीक्षकों की जिम्मेदारी पर संकट, विभागीय आदेश के बाद मचा हड़कंप
रिपोर्ट /रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावास, आश्रम शालाओं एवं आवासीय विद्यालयों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों को लेकर अब विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। 30 सितंबर 2026 को जारी आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग के आदेश के बाद लंबे समय से अधीक्षक/वार्डन के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों की पदस्थापना पर नियमों की तलवार लटक गई है।
विभाग के आदेश के अनुसार छात्रावास, आश्रम शाला एवं आवासीय विद्यालयों में पदस्थ अधीक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया e-HRMS Portal के माध्यम से निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार की जानी है। आदेश में लंबे समय से एक ही संस्था में पदस्थ अधीक्षकों को स्थानांतरित किए जाने के साथ-साथ पात्रता एवं पदस्थापना से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

छिंदवाड़ा में सबसे बड़ा असर!
छिंदवाड़ा जनजातीय कार्य विभाग के अधीन छात्रावासों और आश्रम शालाओं में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जो लंबे समय से इसी व्यवस्था में बने हुए हैं। विभागीय आदेश के बाद अब इनकी पदस्थापना की पात्रता और निर्धारित शर्तों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि छिंदवाड़ा जिले में करीब 90 प्रतिशत तक ऐसे अधीक्षक हो सकते हैं, जो नए नियमों की सभी शर्तें पूरी नहीं करते हैं। हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि विभाग द्वारा किया जाना बाकी है। यदि जांच में ये शिक्षक निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते पाए जाते हैं तो उन्हें अधीक्षक का दायित्व छोड़कर अपनी मूल शाला में वापस जाना पड़ सकता है।
7 साल पूरे करने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन अधीक्षकों ने एक ही छात्रावास, आश्रम शाला अथवा आवासीय विद्यालय में 7 वर्ष या उससे अधिक की अवधि पूरी कर ली है, उनकी पुनः उसी स्थान पर पदस्थापना नहीं की जाएगी। ऐसे अधीक्षकों को अन्य संस्था में पदस्थ किया जाना है और एक अधीक्षक को केवल एक ही संस्था का प्रभार दिए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिक्त पद पर ही पदस्थापना की जा सकेगी। इसके अलावा जिन शिक्षकों की निर्धारित पात्रता नहीं बनती है, उन्हें अधीक्षक के पद पर बनाए रखने को लेकर भी सवाल खड़े होंगे।
ई-एचआरएमएस पोर्टल पर होगी पूरी प्रक्रिया
आदेश के मुताबिक प्रथम चरण में 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक पात्र अधीक्षकों को e-HRMS Portal पर विकल्प देने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके बाद 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक छात्रावास, आश्रम शाला एवं आवासीय विद्यालयों के अधीक्षकों के रिक्त पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया रखी गई है।
अब विभागीय अधिकारियों की परीक्षा भी
इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि छिंदवाड़ा जिले में कितने अधीक्षक वास्तव में निर्धारित नियमों और पात्रता की कसौटी पर खरे उतरते हैं? क्या विभाग सभी अधीक्षकों की नियुक्ति, मूल पद, पदस्थापना अवधि और पात्रता की निष्पक्ष जांच करेगा? और यदि बड़ी संख्या में अधीक्षक नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं तो क्या उन्हें तत्काल मूल शाला में वापस भेजा जाएगा?
सालों से छात्रावासों पर जमे अधीक्षकों पर गिरी तबादले की गाज!
जनजातीय कार्य विभाग ने कसा शिकंजा,








