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15 नवंबर से खुलेंगी नहरें, छिंदवाड़ा में 72,418 हेक्टेयर रकबे को मिलेगा रबी सिंचाई का पानी

15 नवंबर से खुलेंगी नहरें, छिंदवाड़ा में 72,418 हेक्टेयर रकबे को मिलेगा रबी सिंचाई का पानी

जलाशयों में कम जलभराव के चलते सिंचाई के नियमों में बदलाव, एक पलेवा के लिए अब 21 की बजाय 15 दिन मिलेगा पानी

छिंदवाड़ा। जिले में कम बारिश और जलाशयों में घटते जलस्तर को देखते हुए रबी फसलों की सिंचाई के लिए जल प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के सभी जलाशयों की नहरें 15 नवंबर 2026 से खोली जाएंगी। इसके माध्यम से जिले में कुल 72,418 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, जलभराव की स्थिति के अनुसार किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। इस बार एक पलेवा के लिए 21 दिन के स्थान पर केवल 15 दिन तक पानी देने का निर्णय लिया गया है।

19 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर हरेंद्र नारायन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छिंदवाड़ा सांसद विवेक बंटी साहू, अमरवाड़ा विधायक कमलेश प्रताप शाह, चौरई विधायक सुजीत सिंह चौधरी, पूर्व विधायक पं. रमेश दुबे सहित जनप्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। बैठक में रबी सिंचाई के लक्ष्य, नहर संचालन, जलाशयों की स्थिति, स्टॉप डैम के गेट बंद करने और पेंच परियोजना सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

72 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिलेगा पानी

बैठक में तय किए गए सिंचाई लक्ष्य के अनुसार पेंच व्यपवर्तन वृहद परियोजना से 48,532 हेक्टेयर, 108 लघु सिंचाई परियोजनाओं से 17,880 हेक्टेयर तथा स्टॉप डैम और बैराज के माध्यम से 6,006 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। जनप्रतिनिधियों ने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि टेल क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाई का लाभ मिल सके।

44 जलाशयों में 25 प्रतिशत तक ही पानी

बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2026 की स्थिति में जिले की एक वृहद परियोजना पेंच, एक मध्यम परियोजना कन्हरगांव, 108 लघु सिंचाई परियोजनाओं और 43 स्टॉप डैम सहित कुल 153 जल संरचनाओं की जलभराव स्थिति की समीक्षा की गई। पेंच व्यपवर्तन परियोजना में 88.5 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया, जबकि कन्हरगांव परियोजना में केवल 5 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। जिले के कुल 44 जलाशयों में जलभराव 0 से 25 प्रतिशत के बीच है। ऐसे में सिंचाई के लिए पानी का उपयोग उपलब्ध जल के अनुरूप करने का निर्णय लिया गया है।

जलभराव के अनुसार मिलेगा सिंचाई का पानी

समिति ने जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर सिंचाई की व्यवस्था निर्धारित की है। इसके तहत 100 प्रतिशत भरे जलाशयों से एक पलेवा और तीन पानी, 75 प्रतिशत से अधिक लेकिन 100 प्रतिशत से कम भरे जलाशयों से एक पलेवा और दो पानी, 50 से 75 प्रतिशत तक भरे जलाशयों से एक पलेवा और एक पानी तथा 25 से 50 प्रतिशत तक भरे जलाशयों से केवल एक पलेवा दिया जाएगा।

इसके साथ ही एक पलेवा के लिए सिंचाई अवधि 21 दिन से घटाकर 15 दिन निर्धारित की गई है। बैठक में किसानों से अपील की गई कि वे जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें। चना, सरसों और मसूर को बेहतर विकल्प बताया गया। गेहूं की बोनी करने वाले किसानों को पर्याप्त सिंचाई पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने पर ही बुवाई करने की सलाह दी गई।

पानी चोरी करने वालों पर होगी कार्रवाई

सांसद विवेक बंटी साहू ने निर्देश दिए कि नहरों में अवैध पंप लगाकर पानी चोरी करने वालों के विरुद्ध संयुक्त टीम बनाकर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने पानी की बर्बादी रोकने और उपलब्ध जल का उचित उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पानी चोरी की आशंका को देखते हुए सिंचाई के लिए पंपों को अस्थायी विद्युत कनेक्शन (टीसी) नहीं देने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में सभी स्टॉप डैम के गेट 26 अक्टूबर तक बंद कराने तथा नहरों की आवश्यक मरम्मत का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। सांसद ने माइक्रो इरीगेशन परियोजना-1 और 2 की प्रगति की जानकारी भी ली। काम में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई में देरी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। इस पर कलेक्टर ने वरिष्ठ कार्यालय से समन्वय कर अर्धशासकीय पत्र तैयार करने के निर्देश संबंधित कार्यपालन यंत्री को दिए।

विशेष: कम जलभराव के बीच इस बार रबी सिंचाई में किसानों को पानी का उपयोग सावधानी से करना होगा। प्रशासन की चुनौती नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के साथ-साथ उपलब्ध जल का उचित प्रबंधन करना भी रहेगा।