सरकारी हॉस्टल में भोजन व्यवस्था पर उठे सवाल, आदिवासी विद्यार्थियों ने की जांच की मांग
लहगडूआ जूनियर छात्रावास में पर्याप्त भोजन नहीं मिलने की शिकायत, अधीक्षक पर दुर्व्यवहार और धमकी के आरोप
छिंदवाड़ा। आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सरकारी छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर लहगडूआ जूनियर छात्रावास के कुछ विद्यार्थियों ने गंभीर शिकायतें सामने रखी हैं। बच्चों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है। शिकायत करने पर छात्रावास अधीक्षक द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज करने और हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी देने के दावे भी सामने आए हैं।
विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद जनजातीय कार्य विभाग की छात्रावास व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विद्यार्थियों ने बताई भोजन व्यवस्था की परेशानी
छात्रावास से बाहर आए बच्चों के अनुसार, उन्हें कई बार पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पाता। विद्यार्थियों का कहना है कि भोजन व्यवस्था को लेकर परेशानी लंबे समय से बनी हुई है और अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए उन्हें छात्रावास से बाहर आना पड़ा।
यदि शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो यह विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा गंभीर मामला होगा। शासन द्वारा जिन बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई गई है, उन्हें भोजन की शिकायत लेकर बाहर क्यों आना पड़ा—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
भोजन के वीडियो और वास्तविक व्यवस्था पर सवाल
शिकायतों में यह आरोप भी सामने आया है कि भोजन का वीडियो विभागीय पोर्टल या ऐप पर अपलोड करते समय चार-पांच थालियों में अच्छा खाना दिखाया जाता है। इसके बाद दाल और सब्जी में पानी मिला दिए जाने का दावा किया गया है।
इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि भोजन की तस्वीरें और वीडियो किस समय लिए जाते हैं, क्या सभी विद्यार्थियों को समान मात्रा में भोजन मिलता है और अपलोड किए गए वीडियो की वास्तविकता की निगरानी कौन करता है।
अधीक्षक पर दुर्व्यवहार के आरोप
शिकायत करने वाले विद्यार्थियों ने छात्रावास अधीक्षक पर कथित तौर पर गाली-गलौज करने और हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो छात्रावास में विद्यार्थियों के साथ व्यवहार, अनुशासन व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिकायत करने वाले बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव न बनाया जाए और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई मिले।

बाहरी लोगों पर प्रतिबंध के साथ बच्चों की शिकायतों पर भी ध्यान जरूरी
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा छात्रावासों में बाहरी लोगों के प्रवेश और अनावश्यक आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के लिए पत्र जारी किया गया है। सुरक्षा और अनुशासन की दृष्टि से यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
लेकिन छात्रावास के भीतर रहने वाले बच्चे ही यदि भोजन और व्यवहार को लेकर शिकायत कर रहे हैं, तो उनकी सुनवाई की व्यवस्था कितनी प्रभावी है—यह भी उतना ही महत्वपूर्ण सवाल है। क्या विद्यार्थियों की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच रही हैं? क्या अधीक्षक के विरुद्ध शिकायत करने वाले बच्चों को सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल मिल रहा है?

छात्रावास की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की आवाज सुनना उससे भी अधिक जरूरी है।
₹1720 प्रति विद्यार्थी प्रतिमाह भोजन बजट, फिर शिकायत क्यों?
जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों में विद्यार्थियों के भोजन के लिए प्रतिमाह प्रति विद्यार्थी ₹1720 का बजट निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। इस राशि से सब्जी, तेल और मसालों जैसी सामग्री की व्यवस्था की जाती है, जबकि अनाज की आपूर्ति शासन स्तर से किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।
ऐसे में लहगडूआ छात्रावास में पर्याप्त भोजन नहीं मिलने की शिकायत पर विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि निर्धारित बजट का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। क्या भोजन सामग्री की नियमित खरीदी हो रही है? क्या खाद्यान्न का स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड सही है? क्या विद्यार्थियों को निर्धारित मात्रा में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है?
इन सभी सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।
निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
लहगडूआ जूनियर छात्रावास के विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की जानी चाहिए। जांच के दौरान भोजन की मात्रा और गुणवत्ता, खाद्यान्न स्टॉक, खरीद-बिल, वितरण रिकॉर्ड और विद्यार्थियों के बयान दर्ज किए जाएं।
इसके साथ ही भोजन के वीडियो और तस्वीरें अपलोड करने की प्रक्रिया की भी जांच हो, ताकि वास्तविक भोजन व्यवस्था और विभागीय रिकॉर्ड के बीच किसी अंतर की स्थिति स्पष्ट हो सके।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर विभाग को वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
विद्यार्थियों की मांग—पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले
सरकारी छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त भोजन, सुरक्षित आवास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में बच्चों का छात्रावास से बाहर आकर भोजन की शिकायत करना विभागीय निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा सकता है।
बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा मामला है—निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए और हर विद्यार्थी को पर्याप्त व पौष्टिक भोजन मिले।
टीप/समाचार में उल्लिखित आरोप बच्चों की ओर से सामने आई शिकायतों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित छात्रावास अधीक्षक एवं जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
— पंचायत दिशा समाचार








