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स्कूल का बाबू तहसील में, विभाग के नियम फाइलों में!13 साल से अटैचमेंट का दावा, तुमड़ागढ़ी स्कूल में लिपिकीय पद खाली होने के आरोप;

स्कूल का बाबू तहसील में, विभाग के नियम फाइलों में!
13 साल से अटैचमेंट का दावा, तुमड़ागढ़ी स्कूल में लिपिकीय पद खाली होने के आरोप; सहायक आयुक्त की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
आखिर कब हटेगा अटैचमेंट? जनजातीय विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मूल पदस्थापना से बाहर कर्मचारी को लेकर जांच की मांग

रिपोर्ट/रामकुमार राजपूत

मोबाइल/8989115284
छिंदवाड़ा/बिछुआ। जनजातीय कार्य विभाग में कर्मचारियों के अटैचमेंट की व्यवस्था को लेकर सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिछुआ विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुमड़ागढ़ी में पदस्थ बाबू वासुदेव छेरके के लंबे समय से तहसील कार्यालय में अटैचमेंट पर कार्य करने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वर्ष 2013 से कर्मचारी मूल विद्यालय के बजाय तहसील कार्यालय में सेवाएं दे रहा है। यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतने लंबे समय तक अटैचमेंट की समीक्षा क्यों नहीं हुई?


स्कूल में पदस्थ, काम तहसील में!
शासकीय स्कूलों में लिपिकीय कर्मचारी की भूमिका विद्यार्थियों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, रिकॉर्ड संधारण, पत्राचार और कार्यालयीन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी स्कूल का बाबू लंबे समय तक मूल संस्था से बाहर कार्य करता है, तो विद्यालय की व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
तुमड़ागढ़ी स्कूल के बाबू वासुदेव छेरके के मामले में भी यही सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मूल पदस्थापना स्कूल में होने के बावजूद कर्मचारी तहसील कार्यालय में कार्य कर रहा है। अब विभाग को स्पष्ट करना होगा कि यह व्यवस्था किस आदेश के तहत संचालित है और क्या मूल विद्यालय में लिपिकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं?


2013 से जारी है अटैचमेंट? रिकॉर्ड खोले विभाग
मामले में सबसे गंभीर दावा वर्ष 2013 से अटैचमेंट जारी रहने का है। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो लगभग 13 वर्षों से कर्मचारी मूल पदस्थापना स्थल से बाहर सेवाएं दे रहा है। इतनी लंबी अवधि के अटैचमेंट को लेकर विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी हो जाती है।
सवाल यह है कि अटैचमेंट आदेश किस अधिकारी ने जारी किया? आदेश की अवधि कितनी थी? क्या समय-समय पर नवीनीकरण किया गया? क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई? क्या मूल विद्यालय से कर्मचारी की आवश्यकता को लेकर रिपोर्ट मांगी गई?
इन सभी सवालों के जवाब दस्तावेजों से ही सामने आ सकते हैं।
सहायक आयुक्त की कार्रवाई पर निगाहें
मामले में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त की भूमिका भी चर्चा में है। यदि कर्मचारी का अटैचमेंट नियमों के तहत हुआ है, तो उसकी वैधता और अवधि स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं यदि अटैचमेंट नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो उसे समाप्त कर मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने की कार्रवाई अपेक्षित है।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि विभाग इस मामले में केवल मौखिक आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करे। आखिर कब तक स्कूल का कर्मचारी दूसरे कार्यालय में काम करता रहेगा और मूल विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप लगते रहेंगे?
तहसील को बाबू चाहिए तो स्कूल का पद क्यों?
यदि तहसील कार्यालय में कर्मचारी की आवश्यकता है, तो विभागीय स्तर पर नियमानुसार पदस्थापना अथवा अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यदि स्कूल के पद पर नियुक्त कर्मचारी को लंबे समय तक बाहर रखा जाता है, तो यह सवाल भी उठता है कि मूल संस्था के कामकाज की जिम्मेदारी किसके पास है?
क्या विभाग ने कभी यह आकलन किया कि तुमड़ागढ़ी स्कूल में लिपिकीय कार्य सुचारु रूप से चल रहे हैं या नहीं? क्या स्कूल प्रबंधन से रिपोर्ट ली गई? क्या अटैचमेंट जारी रखने का कोई ताजा आदेश मौजूद है?
नियमों की समीक्षा कब होगी?
जनजातीय कार्य विभाग में कर्मचारियों की पदस्थापना और अटैचमेंट को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में तुमड़ागढ़ी स्कूल का मामला विभागीय व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है।
यदि अटैचमेंट अस्थायी व्यवस्था है, तो वर्षों तक उसका जारी रहना जांच का विषय है। यदि यह नियमानुसार स्वीकृत है, तो विभाग को आदेश और नियम सार्वजनिक करने चाहिए। इससे स्थिति स्पष्ट होगी और लगाए जा रहे आरोपों पर भी विराम लग सकेगा।
अब विभाग से जवाब की दरकार
वासुदेव छेरके का मूल पदस्थापना स्थल तुमड़ागढ़ी स्कूल है या नहीं?
तहसील कार्यालय में अटैचमेंट का आदेश किसने जारी किया?
वर्ष 2013 से अटैचमेंट जारी रहने का दावा सही है या नहीं?
अटैचमेंट की वर्तमान वैधता और अवधि क्या है?
क्या मूल विद्यालय में बाबू का पद रिक्त है?
क्या अटैचमेंट की समीक्षा की गई?
सहायक आयुक्त इस मामले में कब तक लिखित कार्रवाई करेंगे?
सहायक आयुक्त का आश्वासन, अब आदेश का इंतजार
मामले में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने कहा है कि यदि कोई बाबू अटैचमेंट में है, तो उसे तुरंत वापस किया जाएगा। संबंधित स्कूल से भी जानकारी ली जाएगी और संबंधित बाबू को स्कूल वापस किया जाएगा।
अब देखना यह है कि विभाग इस आश्वासन को आदेश में कब बदलता है। क्या वासुदेव छेरके को वास्तव में तुमड़ागढ़ी स्कूल वापस भेजा जाएगा, या फिर अटैचमेंट की यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी?
विभागीय कार्रवाई और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।