पहाड़ से ऊंचा हौसला! 16,460 फीट पर जतिन ने फहराया तिरंगा
माउंट गोरिचेन क्षेत्र की ग्लेशियर चोटी पर सफल आरोहण, 28 दिवसीय बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स भी किया पूर्ण
छिंदवाड़ा। हौसला बुलंद हो तो ऊंचे से ऊंचा पहाड़ भी मंजिल बन जाता है। छिंदवाड़ा के युवा पर्वतारोही और एनसीसी अंडर ऑफिसर जतिन बंदेवार ने अपनी मेहनत, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है। अरुणाचल प्रदेश में करीब 16,460 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट गोरिचेन क्षेत्र की ग्लेशियर चोटी का सफल आरोहण कर जतिन ने वहां भारतीय तिरंगा फहराया और छिंदवाड़ा का नाम गौरवान्वित किया।
जतिन शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, छिंदवाड़ा के छात्र हैं और 24 मध्य प्रदेश बटालियन एनसीसी से जुड़े हुए हैं। वे पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास, खापाभाट, छिंदवाड़ा में निवासरत हैं। पढ़ाई के साथ एनसीसी और साहसिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले जतिन ने अब पर्वतारोहण के क्षेत्र में जिले को नई पहचान दिलाई है।
28 दिन का कठिन प्रशिक्षण, फिर ग्लेशियर चोटी पर तिरंगा
जतिन ने अरुणाचल प्रदेश स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (NIMAS) में 18 अगस्त से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित 28 दिवसीय बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें रॉक, स्नो और ग्लेशियर क्षेत्र में पर्वतारोहण की तकनीकों के साथ पर्वतीय सुरक्षा, उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता और विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इसी प्रशिक्षण अभियान के दौरान जतिन ने करीब 16,460 फीट की ऊंचाई तक चुनौतीपूर्ण आरोहण पूरा किया। ग्लेशियर और कठिन मौसम के बीच चोटी तक पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराना उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छिंदवाड़ा जिले के लिए गौरव का क्षण बन गया।
कठिन परिस्थितियों में नहीं डिगा हौसला
बर्फीले और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में आरोहण आसान नहीं था। ऊंचाई, मौसम और ग्लेशियर की चुनौती के बीच कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए जतिन ने अपने प्रशिक्षण और आत्मविश्वास का परिचय दिया। चोटी पर तिरंगा फहराकर उन्होंने यह संदेश दिया कि मंजिल कितनी भी ऊंची क्यों न हो, मजबूत इरादों के सामने मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
जतिन की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने नियमित पढ़ाई के साथ एनसीसी और साहसिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण हासिल किया। उनकी सफलता जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
16,460 फीट की ऊंचाई पर लहराता तिरंगा सिर्फ एक पर्वतारोहण की सफलता नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा के युवा साहस, अनुशासन और संकल्प की पहचान बनकर सामने आया है।








