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आदिवासी खेल परिसर में बड़ा खेल! छत से टपक रहा पानी, बदहाल तस्वीरें खोल रही व्यवस्थाओं की पोल

आदिवासी खेल परिसर में बड़ा खेल! छत से टपक रहा पानी, बदहाल तस्वीरें खोल रही व्यवस्थाओं की पोल
तामिया के आदिवासी खेल परिसर में करीब 100 विद्यार्थियों का रहवास, निर्माण कार्यों और रखरखाव पर उठे सवाल
छत पर पेविंग के बावजूद पानी का रिसाव! सड़क निर्माण से लेकर भवन की देखरेख तक जांच की मांग, जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पंचायत दिशा समाचार | विशेष रिपोर्ट
छिंदवाड़ा/तामिया। आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, खेल सुविधाएं और सुरक्षित रहवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आदिवासी खेल परिसर की व्यवस्थाएं इन दिनों सवालों के घेरे में हैं। परिसर में छत से पानी टपकने, भवन के रखरखाव में कथित लापरवाही और महान हस्तियों की बदहाल तस्वीरों ने जनजातीय कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 100 आदिवासी छात्र यहां अध्ययन एवं रहवास करते हैं। ऐसे में यदि भवन की व्यवस्थाओं में लापरवाही बरती जा रही है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
छत पर पेविंग, फिर भी पानी का रिसाव!
आदिवासी खेल परिसर के भवन की छत पर पेविंग कार्य किए जाने के बावजूद बारिश के दौरान पानी के रिसाव की समस्या सामने आने का दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि छत पर निर्माण कार्य कराया गया था, तो उसके बाद भी पानी टपकने की स्थिति क्यों बनी हुई है? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों ने कार्य पूर्ण होने के बाद स्थल का तकनीकी सत्यापन कराया था?
छत पर लाखों का काम, फिर भी बारिश में राहत नहीं?
यदि जांच में निर्माण कार्य में तकनीकी खामी या मानकों के विपरीत कार्य पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदार, तकनीकी अमले और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता होगी। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


महान हस्तियों की तस्वीरों की बदहाली, विभागीय देखरेख पर सवाल
परिसर की दीवारों पर विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से महान हस्तियों की तस्वीरें बनाई गई थीं। लेकिन वर्तमान में इन तस्वीरों पर गंदगी और रंगों के खराब होने की स्थिति सामने आने का दावा है। ऐसे में सवाल उठता है कि परिसर की नियमित साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
महान हस्तियों की तस्वीरें केवल दीवारों की सजावट नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का माध्यम होती हैं। यदि इनकी देखरेख नहीं हो रही है, तो यह परिसर के रखरखाव और विभागीय निगरानी की स्थिति पर सवाल खड़े करता है।


सड़क निर्माण से लेकर भवन की निगरानी तक जांच की जरूरत
परिसर में सड़क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों और रखरखाव में पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में जनजातीय कार्य विभाग को परिसर के निर्माण कार्यों, सड़क निर्माण, छत पर किए गए पेविंग कार्य, भवन की गुणवत्ता और रखरखाव का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
करीब 100 आदिवासी छात्र, सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी?
आदिवासी खेल परिसर में करीब 100 आदिवासी छात्र अध्ययन एवं रहवास करते हैं। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित भवन, मजबूत छत, साफ-सफाई, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसे में यदि बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या सामने आ रही है, तो इसे महज सामान्य रखरखाव का मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़े मामलों में समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
जांच हुई तो खुल सकती है निर्माण कार्यों की पूरी कहानी
परिसर में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। जांच के दायरे में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए—
छत पर किए गए पेविंग कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी स्वीकृति।
बारिश के दौरान पानी के रिसाव का कारण।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता एवं संबंधित ठेकेदार।
भवन की मरम्मत और रखरखाव पर खर्च की गई राशि।
महान हस्तियों की तस्वीरों की देखरेख की जिम्मेदारी।
संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और सत्यापन।
यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, तकनीकी खामी या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
विभाग के जिम्मेदार अफसर कब लेंगे संज्ञान?
आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बनाए गए खेल परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों ने जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह है कि क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने परिसर का नियमित निरीक्षण किया है? क्या भवन की छत, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराई गई है? यदि कराई गई है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक संज्ञान लेते हैं और परिसर का भौतिक एवं तकनीकी सत्यापन कब कराया जाता है।
विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार

इस संबंध में जनजातीय कार्य विभाग एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।