नोटिसों में सिमटा जनजातीय कार्य विभाग का सिस्टम? बच्चों की थाली में सड़ी सब्जियां, टंकियों में गंदगी और रसोई में घरेलू गैस सिलेंडर!
एकलव्य विद्यालय के औचक निरीक्षण में व्यवस्थाओं की खुली पोल, आदिवासी विद्यार्थियों की सेहत से खिलवाड़ के गंभीर आरोप
केंद्रीय जनजाति आयोग के सलाहकार सदस्य प्रकाश उईके के निरीक्षण में बदइंतजामी उजागर, ठेकेदार और प्राचार्य को नोटिस के निर्देश—अब सवाल, कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दबेगा?
रिपोर्ट /रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव। आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित आवासीय माहौल देने के सरकारी दावों की उस समय पोल खुल गई, जब एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, जुन्नारदेव में शनिवार को हुए औचक निरीक्षण के दौरान रसोई, पेयजल, स्वच्छता और भोजन व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं। बच्चों की थाली तक पहुंच रही खराब सब्जियां, गंदे पानी की टंकियां और रसोई में घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
केंद्रीय जनजाति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार सदस्य प्रकाश उईके ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही भोजन, आवास, पेयजल, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान रसोई में कुछ सब्जियां खराब और सड़ी हुई मिलीं, जबकि कच्ची सब्जियों में कीड़े लगे होने की बात भी सामने आई। यह स्थिति सामने आने के बाद भोजन व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई और खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए लिए गए।

रसोई में सड़ी सब्जियां, बच्चों ने खोली भोजन की गुणवत्ता की पोल
निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की गई। बच्चों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। चावल और रोटी के स्वाद समेत भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। सवाल यह है कि जिन बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन का बजट जारी होता है, उनकी थाली में आखिर ऐसी सामग्री कैसे पहुंच रही है?
मामला केवल भोजन तक सीमित नहीं रहा। निरीक्षण में पेयजल टंकियों की सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई। टंकियों में गंदगी होने की बात सामने आई। भोजन कक्ष, चाय-नाश्ते की व्यवस्था और शौचालय परिसर का भी निरीक्षण किया गया, जहां स्वच्छता संबंधी कमियां पाए जाने की बात कही गई।

रसोई में घरेलू गैस सिलेंडर, नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला कौन?
निरीक्षण के दौरान भोजन तैयार करने में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग की बात भी सामने आई। अब बड़ा सवाल यह है कि आवासीय विद्यालय की रसोई में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल आखिर किसकी अनुमति से किया जा रहा था? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?
मौके पर मौजूद संबंधित कर्मचारियों से जानकारी ली गई। खराब खाद्य सामग्री एवं सब्जियों के नमूने जांच के लिए लिए गए तथा मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। हालांकि, जांच के नतीजे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, इस पर अब निगाहें टिकी हैं।
ठेकेदार और प्राचार्य पर नाराजगी, नोटिस से आगे बढ़ेगा मामला?
निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को लेकर प्रकाश उईके ने संबंधित ठेकेदार एवं प्राचार्य के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मामले में संबंधित ठेकेदार एवं प्राचार्य को नोटिस जारी करने तथा जवाबतलब कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सूचना के बाद तहसीलदार के मौके पर पहुंचने और जांच प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है। लेकिन सवाल वही है—क्या नोटिस के बाद वास्तव में जिम्मेदारी तय होगी या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
सवाल यह—हर बार निरीक्षण, फिर नोटिस और मामला खत्म?
एकलव्य विद्यालय में सामने आई कमियां जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विभाग के अधीन संचालित छात्रावासों और आवासीय संस्थानों में समय-समय पर भोजन, स्वच्छता और व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में अक्सर जांच, नोटिस और जवाबतलब की कार्रवाई दिखाई देती है, लेकिन ठोस दंडात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड जनता के सामने नहीं आता।
यदि किसी संस्थान में खराब खाद्य सामग्री पाई जाती है, पेयजल टंकियों की सफाई व्यवस्था बदहाल मिलती है और भोजन बनाने की व्यवस्था में नियमों के पालन पर प्रश्न खड़े होते हैं, तो केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं हो सकता। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि बच्चों की सेहत और सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वालों पर वास्तविक कार्रवाई कब होगी।
सहायक आयुक्त से जनता के सीधे सवाल
छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी कौन करता है?
निरीक्षण के बाद जारी किए गए पूर्व नोटिसों पर कितने मामलों में अंतिम कार्रवाई हुई?
भोजन उपलब्ध कराने वाली एजेंसी/ठेकेदार के विरुद्ध अब तक कितनी कार्रवाई की गई?
घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग की अनुमति किसने दी?
छिंदवाड़ा जिले में संचालित होने वाले छात्रावास में इन दोनों घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग हो रहा है लेकिन जनजातिकार्य विभाग के निरीक्षण करने वाले अधिकारी ये कभी नहीं देखते हैं कि छात्रावास में क्या हो रहा है। इसी कारण आज बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है खाद्य-सामग्री की नियमित गुणवत्ता जांच की व्यवस्था क्या है?
पेयजल टंकियों की सफाई कितने अंतराल में कराई जाती है?
क्या विभाग यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले एक वर्ष में कितने अधीक्षकों, प्राचार्यों और एजेंसियों को नोटिस जारी हुए और कितनों पर वास्तव में दंडात्मक कार्रवाई हुई?
नोटिस से आगे बढ़ेगा विभाग या फिर वही पुरानी कहानी?
आदिवासी विद्यार्थियों के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर आवासीय शिक्षा व्यवस्था संचालित कर रही है। ऐसे में बच्चों को मिलने वाले भोजन, पानी और रहने की व्यवस्था में किसी भी स्तर की लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक कमी मानकर टालना गंभीर और अस्वीकार्य है। खराब भोजन और गंदे पानी का सीधा असर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जुन्नारदेव एकलव्य विद्यालय के निरीक्षण में सामने आई कमियों पर कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई भी होती है। यदि विभाग फिर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा, तो यह सवाल और तीखा होगा कि जनजातीय विद्यार्थियों की सुरक्षा और अधिकारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








