सहायक आयुक्त का तुगलकी फरमान! छात्रावासों में मीडिया पर तालाबंदी?
फोटो-वीडियो के लिए अनुमति की शर्त, लेकिन बदहाल व्यवस्थाओं पर कौन रखेगा नजर? छात्रावासों से सड़कों तक पहुंच रहे आदिवासी विद्यार्थी, भोजन और मूलभूत सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल..!
रिपोर्ट /रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों और आश्रम शालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच मीडिया कर्मियों के छात्रावासों में बिना अनुमति प्रवेश तथा फोटो-वीडियो बनाने पर रोक संबंधी सहायक आयुक्त के निर्देश ने नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि यदि छात्रावासों में सब कुछ व्यवस्थित है, तो फिर वहां की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए मीडिया की पहुंच पर पाबंदी क्यों?
एक ओर विभागीय अधिकारी छात्रावासों में मीडिया की गतिविधियों को अनुमति के दायरे में रखने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में विद्यार्थियों की भोजन, पानी, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि मीडिया पर नियंत्रण जरूरी है या छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर सख्त निगरानी?

छात्रावासों की बदहाली पर उठते सवाल, सड़कों तक पहुंच रहे विद्यार्थी
छिंदवाड़ा जिले में जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में भी शिकायतें सामने आती रही हैं। विद्यार्थियों द्वारा भोजन, मूलभूत सुविधाओं और छात्रावास प्रबंधन से संबंधित समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखने के मामले चर्चा में रहे हैं।
कन्या आश्रम की छात्राओं का थाने तक पहुंचना
जिला मुख्यालय स्थित कन्या आश्रम की छात्राओं के पुलिस थाने तक पहुंचने का मामला सामने आया था। छात्राओं की समस्याओं को लेकर यह घटनाक्रम छात्रावास प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए थाने तक पहुंचना पड़ा?
अमरवाड़ा में कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना
अमरवाड़ा आदिवासी सीनियर कन्या छात्रावास की छात्राओं द्वारा कलेक्टर कार्यालय छिंदवाड़ा के सामने धरना दिए जाने की बात भी सामने आई थी। यदि विद्यार्थियों को छात्रावास में ही अपनी समस्याओं का समाधान मिल जाए, तो उन्हें जिला मुख्यालय तक पहुंचकर प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़े?
हरदुआमाल बालक आश्रम से बच्चों के निकलने का मामला
चौरई विकासखंड के हरदुआमाल बालक आश्रम के बच्चों के सुबह-सुबह आश्रम से निकलकर घर की ओर जाने का मामला भी चर्चा में रहा। इस घटनाक्रम ने आश्रम शाला की व्यवस्थाओं, बच्चों की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
न्यूटन चिखली में भोजन और प्रताड़ना की शिकायत
न्यूटन चिखली कन्या छात्रावास की छात्राओं द्वारा भोजन में कीड़े निकलने तथा अधीक्षिका पर काम कराने और प्रताड़ित करने संबंधी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया था। छात्राओं के छात्रावास से बाहर निकलकर परासिया एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन देने की बात भी सामने आई थी।
इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। लेकिन यदि शिकायतें सही हैं, तो यह विभागीय अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।
तामिया एकलव्य विद्यालय में भोजन को लेकर प्रदर्शन
तामिया के एकलव्य आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा भोजन में कीड़े मिलने और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर धरना देने की बात भी सामने आई थी। यह मामला भी सवाल उठाता है कि आवासीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रहन-सहन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
मीडिया पर अनुमति की शर्त, लेकिन क्या नियमों का पालन भी होगा?
सहायक आयुक्त द्वारा छात्रावासों और आश्रम शालाओं में मीडिया कर्मियों के बिना अनुमति प्रवेश तथा फोटो-वीडियो बनाने पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए जाने की बात कही जा रही है। प्रशासनिक दृष्टि से छात्रावासों में बच्चों की निजता, सुरक्षा और अनुशासन का ध्यान रखना जरूरी है। लेकिन इसी के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यदि मीडिया को छात्रावासों में प्रवेश के लिए अनुमति आवश्यक है, तो क्या विभाग शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए पत्रकारों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निरीक्षण की अनुमति देगा? क्या छात्रावासों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए विभाग स्वयं फोटो, वीडियो और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
मीडिया पर नियम लागू करने से पहले विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रावासों में विद्यार्थियों के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े नियमों का पालन किस स्तर तक हो रहा है।
मंत्री के आदेशों का पालन कितना? रात में अधीक्षक रहते हैं या नहीं?
छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विभागीय स्तर पर समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। भोजन की गुणवत्ता, मीनू के अनुसार भोजन, साफ-सफाई, पानी, सुरक्षा और अधीक्षकों की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में सहायक आयुक्त से यह सवाल भी जरूरी है कि—
- क्या जिले के सभी छात्रावासों में निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन दिया जा रहा है?
- क्या भोजन परोसने से पहले फोटो लेकर विभागीय पोर्टल या ऐप पर अपलोड करने संबंधी मंत्री के निर्देशों का पालन हो रहा है?
- क्या छात्रावास अधीक्षक रात में छात्रावास में निवास कर रहे हैं?
- क्या अधिकारियों द्वारा नियमित रात्रि निरीक्षण किया जा रहा है?
- क्या छात्रावासों में पेयजल, शौचालय, बिजली और भवन की स्थिति की जांच हो रही है?
- क्या मरम्मत के नाम पर खर्च की गई राशि और कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है?
यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट हैं, तो विभाग को इन्हें सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
टूटी जालियां, पानी का रिसाव और मरम्मत के नाम पर सवाल
जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न छात्रावासों में भवनों की स्थिति को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं खिड़कियों की जालियां टूटी होने की बात कही जाती है, तो कहीं भवनों में पानी रिसाव और मरम्मत की जरूरत बताई जाती है।
छात्रावासों की मरम्मत पर लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि विद्यार्थियों को जर्जर भवन, टूटे शौचालय, गंदा पानी या अन्य असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है, तो निर्माण कार्यों और मरम्मत खर्च की जांच जरूरी हो जाती है।
हालांकि इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति संबंधित छात्रावासों के निरीक्षण और विभागीय अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगी। विभाग को चाहिए कि सभी छात्रावासों की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
सवाल यह नहीं कि मीडिया अंदर जाए या नहीं, सवाल यह है कि व्यवस्थाएं कैसी हैं?
छात्रावासों में सुरक्षा और विद्यार्थियों की निजता से जुड़े नियमों का पालन होना चाहिए। लेकिन नियमों के नाम पर पारदर्शिता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मीडिया का काम सिर्फ फोटो और वीडियो बनाना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना भी है।
यदि छात्रावासों में भोजन, पानी, शौचालय, भवन और सुरक्षा जैसी समस्याएं हैं, तो उनकी जानकारी सामने आना विद्यार्थियों के हित में है। वहीं यदि व्यवस्थाएं बेहतर हैं, तो विभाग को भी अपनी उपलब्धियां और निरीक्षण रिपोर्ट जनता के सामने रखनी चाहिए।
सहायक आयुक्त महोदय, मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से पहले छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर ध्यान दीजिए। विद्यार्थियों को बेहतर भोजन, सुरक्षित भवन, स्वच्छ पानी और मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करना विभाग की पहली जिम्मेदारी है।
अब देखना यह है कि सहायक आयुक्त महोदय छात्रावासों में मीडिया की आवाजाही को नियंत्रित करने वाले निर्देशों के साथ-साथ विद्यार्थियों के हित में जारी मंत्री के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल
1. क्या छात्रावासों में मीडिया प्रवेश के लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया है? यदि हां, तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाएगी?
2. क्या सभी छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और मीनू का नियमित निरीक्षण हो रहा है?
3. क्या रात्रि में अधीक्षक छात्रावासों में निवास कर रहे हैं? विभागीय रिकॉर्ड में इसकी पुष्टि कैसे होती है?
4. क्या विद्यार्थियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई गई है और उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक होगी?
5. क्या छात्रावासों की मरम्मत पर खर्च राशि का भौतिक सत्यापन किया गया है?
6. क्या विभाग मीडिया को निर्धारित अनुमति प्रक्रिया के तहत छात्रावासों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने की अनुमति देगा?
पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित छात्रावासों से संबंधित शिकायतों और घटनाक्रमों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों, निरीक्षण रिपोर्ट और विद्यार्थियों के अधिकृत बयानों से की जानी आवश्यक है। विभाग एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








