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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना बनी कृषक श्री ओमप्रकाश पवार की सफलता का आधार…

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना बनी कृषक श्री ओमप्रकाश पवार की सफलता का आधार
शिमला मिर्च का हुआ 8 टन उत्पादन, कमाए 9 लाख
छिन्‍दवाड़ा/(पंचायत दिशा समाचार )
शासन की किसान हितैषी योजनाएं आज किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम उमरेठ के कृषक श्री ओमप्रकाश पवार  इसकी जीवंत मिसाल हैं। पहले वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1,50,000 रुपये की शुद्ध आय ही प्राप्त होती थी। सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही थी।
       इसी दौरान उनका संपर्क उद्यानिकी विभाग के अमले से हुआ। विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें शासन की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के बारे में जानकारी दी गई तथा आधुनिक उद्यानिकी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विभागीय मार्गदर्शन में श्री पवार ने अपनी 3.5 एकड़ भूमि पर ड्रिप सिंचाई संयंत्र स्थापित किया। शासन से प्राप्त योजना के लाभ ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी।
       ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने से पानी की बचत हुई, फसलों को समय पर पर्याप्त सिंचाई मिलने लगी तथा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके बाद श्री पवार ने अपनी भूमि पर तकनीकी तरीके से शिमला मिर्च की खेती प्रारंभ की। खेती में बीज, उर्वरक, मजदूरी, जुताई, मल्चिंग एवं अन्य कार्यों पर लगभग 6,25,000 रुपये का व्यय हुआ।
       आधुनिक तकनीक एवं शासन की योजना के सहयोग से उन्हें अभी तक तक लगभग 8 टन शिमला मिर्च का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे लगभग 16,00,000 रुपये की आय अर्जित हुई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग 9,75,000 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। अभी 4 से 5 तुड़ाई और शेष हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त 4 से 5 लाख रुपये की आय होने की संभावना है।


       कृषक श्री ओमप्रकाश पवार बताते हैं कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं उद्यानिकी विभाग का मार्गदर्शन नहीं मिलता, तो वे इतनी उन्नत खेती नहीं कर पाते। आज वे प्रति एकड़ लगभग 3,50,000 से 4,00,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं।
        श्री पवार की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किसान आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती को लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।