सीएम की भाषा पर नकुलनाथ का करारा हमला: जनता से कट चुकी सरकार बौखलाहट में खो रही मर्यादा
छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश की राजनीति में भाषा और मर्यादा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई टिप्पणी को लेकर पूर्व सांसद नकुलनाथ ने तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री की भाषा न केवल अमर्यादित है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक पद की गरिमा के भी विपरीत है।
नकुलनाथ ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जिस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं, वह जनता के सामने सरकार की बढ़ती बेचैनी और राजनीतिक हताशा को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कर्मचारियों की नाराजगी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय सरकार विपक्ष पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं। जनता के सवालों का सामना करने के बजाय यदि सत्ता पक्ष विपक्ष को अपमानित करने की भाषा अपनाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता।
पूर्व सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि करोड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लोकतांत्रिक विपक्ष की आवाज पर हमला है। कांग्रेस पार्टी ऐसे किसी भी प्रयास से डरने वाली नहीं है और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।
नकुलनाथ ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं होता। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता करती है और जनता सब कुछ देख और समझ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मजबूती से खड़ा है और इस अपमान का जवाब लोकतांत्रिक एवं राजनीतिक तरीके से दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की राजनीति को आरोप-प्रत्यारोप और अपमान की नहीं, बल्कि संवाद, जवाबदेही और जनसेवा की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा का सम्मान करते हुए भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।








