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10 साल से एक ही जगह पदस्थ सब इंजीनियर पर उठे सवालजनजाति कार्य विभाग में स्थानांतरण नीति की अनदेखी? निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे प्रश्न…

10 साल से एक ही जगह पदस्थ सब इंजीनियर पर उठे सवाल
जनजाति कार्य विभाग में स्थानांतरण नीति की अनदेखी? निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे प्रश्न

छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। विभाग में पदस्थ एक सब इंजीनियर के पिछले लगभग 10 वर्षों से एक ही जिले में कार्यरत रहने की चर्चाओं ने विभागीय व्यवस्था और स्थानांतरण नीति के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन की सामान्य स्थानांतरण नीति के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ नहीं रखा जाता, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
विभागीय सूत्रों एवं स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ निर्माण कार्यों में नियमित स्थल निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावी रूप से नहीं हो रही है, जिससे गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अब तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार छात्रावास भवनों, मरम्मत कार्यों तथा अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना से कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी उद्देश्य से शासन समय-समय पर स्थानांतरण नीति लागू करता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे।
अब लोगों के बीच यह चर्चा है कि संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण एवं विभागीय व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर क्या निर्णय लिया जाएगा। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा की मांग की है, जिससे शासन की नीतियों के अनुरूप पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
(नोट: उपरोक्त समाचार स्थानीय चर्चाओं एवं प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा होना शेष है।)