आदिवासी अंचल के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, कक्षा समय में शिक्षक के आराम करने का वीडियो सामने आने का दावा
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग..
जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल..!
रिपोर्ट – रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा /जिले के आदिवासी बहुल तामिया विकासखंड के नगरी संकुल अंतर्गत स्थित बुरियल ढाना प्राथमिक शाला से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि विद्यालय समय के दौरान एक शिक्षक कक्षा में आराम करते दिखाई दिए, और स्कूल में एक भी छात्र नहीं है और शिक्षक वायरल वीडियो में कह रहा की बच्चों को मैंने छुट्टी दे दिया है । क्योंकि में किसी कार्यक्रम में रात में गया था इसलिए नींद आ रही थी । और दूसरे शिक्षक जामिया आयें है इसलिए छुट्टी दे दिया।घटना के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालयों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण किया जाए तो ऐसी स्थितियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आदिवासी अंचल के कई विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। उनके अनुसार बीआरसी, बीईओ तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने से लापरवाही के मामलों को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।

प्रमुख सवाल
क्या विद्यालय समय में शिक्षक का आराम करना सेवा नियमों के अनुरूप है?
क्या संबंधित विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?
क्या छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी हो रही है?
यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?
पक्ष आवश्यक:
इस संबंध में संबंधित शिक्षक, संकुल प्राचार्य, बीईओ तथा जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: यह समाचार स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों, सोशल मीडिया में वायरस फोटो/वीडियो और मौके से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।








