Home CITY NEWS निलंबन के बाद फिर पदस्थापना! जनजाति कार्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल..?

निलंबन के बाद फिर पदस्थापना! जनजाति कार्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल..?

निलंबन के बाद फिर पदस्थापना! जनजाति कार्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल..?

आदिवासी छात्रों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़? विभागीय कार्यप्रणाली पर जनता में नाराज़गी
छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा)
जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त छिंदवाड़ा की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। जिले में ऐसे कई छात्रावास अधीक्षकों है, जिन पर पूर्व में गंभीर आरोप लगने के बाद निलंबन की कार्रवाई हुई थी, पुनः बहाल कर महत्वपूर्ण छात्रावासों की जिम्मेदारी दिए जाने से विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग में कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि आरोपों का सामना कर चुके अधीक्षक को दोबारा संवेदनशील पदों पर पदस्थ किया जा रहा है। इससे आदिवासी छात्रों के हितों और छात्रावास व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

छात्रावास में मिलने वाला राशन में गड़बड़ी के आरोपों के बाद फिर जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, प्रश्न गौतम पर चौरई स्थित आदिवासी बालक छात्रावास में अधीक्षक रहते समय छात्रों को मिलने वाले राशन में अनियमितता और राशन बेचने जैसे आरोप लगे थे। इसके बाद विभागीय कार्रवाई हुई, लेकिन कुछ समय पश्चात उन्हें पुनः बहाल कर झिलमिली छात्रावास में अधीक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया।

निलंबन के बाद बढ़ती गई जिम्मेदारियां!

दूसरा मामला जिला मुख्यालय में स्थित पिछड़ा वर्ग छात्रावास में पदस्थ अधीक्षक संजय डेहरिया पर लापरवाही के आरोपों के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था, उन पर कथित रूप से कई गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे थे। लेकिन विभाग के अधिकारियों से मिली भगत कर उन्हें पुनः बहल करते हुए फिर चौरई के आदिवासी बालक छात्रावास में जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वहां भी भारी लापरवाही के कारण अब उन्हें लापरवाही का फायदा देते हुए, जिला मुख्यालय स्थित जूनियर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास, मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के पीछे, में अधीक्षक बनाया गया है।

नौकरी के नाम पर आदिवासी यवकों से वसूली के आरोपों के बाद निलंबन और फिर पदस्थापना..?

ऐसा ही तीसरा मामला देखने को मिला जहां हारी क्षेत्र के आदिवासी युवकों से नौकरी के नाम परतापुर आदिवासी बालक आश्रम अधीक्षक जयपाल सरेआम पर अवैध वसूली के आरोप लगने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था । लेकिन सहायक आयुक्त की मेहरबानी के। बाद उन्हें जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त आदिवासी बालक छात्रावास 120 सीटर छात्रावास का अधीक्षक बना दिया गया।

विभागीय मिलीभगत के आरोप इन मामलों को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में यह चर्चा तेज है कि विभाग के कुछ अधिकारी कथित रूप से आपसी सांठगांठ के चलते कार्रवाई को कमजोर कर रहे हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि गंभीर शिकायतों के बावजूद ऐसे कर्मचारियों को पुनः संवेदनशील जिम्मेदारियां देकर आदिवासी छात्रों के भविष्य को जोखिम में डाला जा रहा है।
जनजाति कार्यवभाग में कार्रवाई सिर्फ दिखावा?”
जानकारों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी पर गंभीर आरोप लगते हैं और विभाग स्वयं निलंबन जैसी कार्रवाई करता है, तो बाद में बिना सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट किए पुनः पदस्थापना करना कई सवाल खड़े करता है। इससे विभाग की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
कलेक्टर और उच्च अधिकारियों से जांच की मांग
अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर एवं भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इन मामलों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की मांग उठाई है।
नोट: उपरोक्त आरोप स्थानीय चर्चाओं, शिकायतों एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।