जनजाति कार्य विभाग में आखिर किसका संरक्षण?
विवादित कर्मचारियों पर मेहरबानी, वर्षों से जमे अधिकारियों-कर्मचारियों को लेकर उठे गंभीर सवाल
छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
जिले का जनजाति कार्य विभाग इन दिनों सवालों के घेरे में है। विभाग के भीतर लंबे समय से चल रही पदस्थापनाओं, अटैचमेंट और विवादित कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागीय सूत्रों और स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जूनियर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास छिंदवाड़ा में पदस्थ एक अधीक्षक पूर्व में लापरवाही और अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों में निलंबन की कार्रवाई झेल चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार जिम्मेदार पदों पर बनाए रखा जाना कर्मचारियों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विभाग के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन कारणों से विवादों में रहे कर्मचारियों पर इतनी मेहरबानी दिखाई जा रही है।
वहीं हर्रई ब्लॉक में पदस्थ रहे एक अन्य अधीक्षक का नाम भी लंबे समय से विवादों में बताया जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर नौकरी दिलाने के नाम पर आर्थिक लेन-देन के आरोपों की चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि इन मामलों में आधिकारिक पुष्टि या न्यायालयीन निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को जिला मुख्यालय स्थित बड़े संयुक्त आदिवासी बालक छात्रावास की जिम्मेदारी सौंपे जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में कई शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए बताए जा रहे हैं। विभागीय जानकारी रखने वाले लोगों का दावा है कि कुछ कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से अधीक्षक का प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि कई शिक्षक लंबे समय से जिला मुख्यालय में ही पदस्थ हैं। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों के जिला कार्यालय में अटैचमेंट पर कार्यरत रहने को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं।
विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि समय-समय पर पारदर्शी तबादला नीति लागू होती हैं । लेकिन इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने की स्थिति आखिर क्यों बनती है । सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नियमों से ज्यादा “सिफारिश और संरक्षण” का प्रभाव विभाग में हावी है?
स्थानीय सामाजिक संगठनों और कर्मचारियों के बीच यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक कर पारदर्शी कार्रवाई की जाए।
हालांकि इन आरोपों और चर्चाओं पर विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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