Home AGRICULTURE जैविक खेती की नई पहचान बना ‘काला आलू’, पांढुर्णा-छिंदवाड़ा के किसान हो...

जैविक खेती की नई पहचान बना ‘काला आलू’, पांढुर्णा-छिंदवाड़ा के किसान हो रहे मालामाल.

जैविक खेती की नई पहचान बना ‘काला आलू’, पांढुर्णा-छिंदवाड़ा के किसान हो रहे मालामाल…

विशेष रपोर्ट -रामकुमार राजपूत

मोबाइल -8989115284

पांढुर्णा/छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अब पांढुर्णा एवं छिंदवाड़ा जिले के किसान जैविक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में “जैविक काला आलू” किसानों के लिए खुशहाली और बेहतर आमदनी का नया माध्यम बनकर उभरा है। कृषि विभाग की सहभागिता और किसानों की मेहनत से यह विशेष फसल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


किसानों ने बताया कि काला आलू का बीज सबसे पहले लखनऊ से लाया गया था, जिसके बाद इसे पूरी तरह ऑर्गेनिक पद्धति से उगाया गया। किसानों के अनुसार इस आलू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सामान्य आलू की तुलना में स्टार्च कम पाया जाता है। साथ ही इसे शुगर फ्री एवं पोषक तत्वों से भरपूर माना जा रहा है, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
किसानों ने बताया कि सामान्य आलू की फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है, जबकि काला आलू तैयार होने में करीब चार महीने का समय लेता है। हालांकि उत्पादन अवधि अधिक होने के बावजूद इसकी बाजार कीमत किसानों को बेहतर लाभ दे रही है। जहां सामान्य आलू 20 से 25 रुपए प्रति किलो बिकता है, वहीं जैविक काला आलू 100 से 110 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। वर्तमान में इसका बाजार सौसर, पांढुर्णा एवं छिंदवाड़ा क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा है।


किसानों का कहना है कि बढ़ती जागरूकता के कारण अब लोग स्वास्थ्यवर्धक एवं जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इस फसल की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि क्षेत्र के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़ जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कृषि कल्याण तथा कृषि विभाग के उपसंचालक श्री जितेंद्र सिंह ने इस काले आलू की कुछ इस तरह से विशेषता बताइए

जितेंद्र सिंह उपसंचालक कृषि कल्याण तथा कृषि विकास विभाग छिंदवाड़ा/ पांढुर्ण

इस संबंध में कृषि कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उपसंचालक जितेंद्र सिंह ने बताया कि जैविक खेती किसानों के लिए भविष्य की बड़ी संभावना बनकर सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि काला आलू जैसी विशेष फसलें किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, जैविक खेती संबंधी प्रशिक्षण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसान नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की मांग देशभर में तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में पांढुर्णा एवं छिंदवाड़ा जिला जैविक खेती के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। विभाग का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना एवं कम लागत में अधिक लाभ दिलाना है।
क्षेत्र में जैविक काला आलू की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान नई तकनीक और जैविक पद्धति अपनाएं तो खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि बेहतर मुनाफे का मजबूत माध्यम भी बन सकती है।