खरीदी केंद्रों की बदहाली पर भड़के अपर कलेक्टर, दो समितियों को थमाया नोटिस
किसानों की लंबी कतारें, तौल में देरी और अव्यवस्थाओं का अंबार — जिम्मेदारों पर गिरी गाज
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार)
जिले में गेहूं-चना उपार्जन व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई जब चौरई और चांद क्षेत्र के खरीदी केंद्रों के निरीक्षण पर पहुंचे अपर कलेक्टर श्री धीरेंद्र सिंह अव्यवस्थाओं को देखकर भड़क उठे। किसानों को राहत देने के दावों के बीच ज़मीनी हकीकत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कलई खोल दी है।

अपर कलेक्टर श्री सिंह एवं एसडीएम चौरई श्री प्रभात मिश्रा ने चौरई विकासखंड के 13 और चांद तहसील के 6 गेहूं उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही चना खरीदी केंद्र — उमरिया ईसरा सेवा सहकारी समिति और भारद्वाज वेयरहाउस (लिखड़ी खटकर) का भी जायजा लिया गया।

निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर बदइंतजामी का आलम यह था कि किसान घंटों धूप में अपनी उपज लेकर खड़े नजर आए। तौल कांटे कम, मजदूर नदारद और बुनियादी सुविधाएं जैसे पेयजल और छाया तक का अभाव देखने को मिला।
अपर कलेक्टर ने तत्काल सख्ती दिखाते हुए निर्देश दिए कि तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 6 की जाए, मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए और किसानों के लिए पानी व छाया की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए पंजी संधारण को अनिवार्य रूप से व्यवस्थित रखने के आदेश दिए।
सबसे गंभीर स्थिति लोटस वेयरहाउस हरदुआ स्थित उपार्जन केंद्रों में देखने को मिली, जहां समिति समसवाड़ा और समिति कपूरधा में हमालों की भारी कमी के कारण खरीदी कार्य बुरी तरह प्रभावित पाया गया। किसानों को अपनी फसल तौलवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, जिससे आक्रोश साफ झलक रहा था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर ने दोनों समितियों के प्रबंधकों और नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो कड़ी कार्रवाई तय है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल..!
जब शासन किसानों को सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, तो आखिर जमीनी स्तर पर ये लापरवाही क्यों? क्या जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी या किसान यूं ही परेशान होते रहेंगे?







