ई-विकास टोकन प्रणाली से खाद संकट गहराया
एक एकड़ में एक बोरी, 5 एकड़ में दो बोरी DAP—किसानों में बढ़ी नाराजगी
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार)
मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-विकास (E-Vikas) टोकन प्रणाली जमीनी स्तर पर किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। शासन द्वारा पोर्टल के माध्यम से घर बैठे खाद बुकिंग और 72 घंटे में वितरण की सुविधा देने का दावा किया गया था, लेकिन क्रियान्वयन में देरी, तकनीकी खामियां और सीमित स्टॉक के चलते व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है।
किसानों का कहना है कि पोर्टल अक्सर काम नहीं करता, जिससे समय पर टोकन नहीं मिल पाता। वहीं, जिन किसानों को टोकन मिल भी रहा है, उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही। कई किसानों ने बताया कि एक एकड़ जमीन के लिए सिर्फ एक बोरी खाद दी जा रही है, जबकि 5 एकड़ जमीन वाले किसान को भी मात्र दो बोरी डीएपी (DAP) खाद मिल रही है। ऐसे में खेती करना मुश्किल हो गया है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब निजी दुकानों में भी सुपर पोटाश और जिंक जैसी आवश्यक खाद उपलब्ध नहीं है। इससे किसानों के सामने विकल्प भी सीमित हो गए हैं और उन्हें मजबूरी में अधूरी खाद के साथ ही खेती की तैयारी करनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी और डिजिटल जानकारी का अभाव भी इस व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। कई किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया समझने में दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें बार-बार समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि यह व्यवस्था कागजों में भले पारदर्शी दिखाई दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत में इसमें कई कमियां हैं। समय पर खाद नहीं मिलने से बोवनी का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था को सुधारने के प्रयास जारी हैं और जल्द ही तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा। वहीं किसान मांग कर रहे हैं कि जब तक यह प्रणाली पूरी तरह से सुचारू नहीं हो जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था को भी समानांतर रूप से चालू रखा जाए, ताकि उन्हें समय पर पर्याप्त खाद मिल सके।







