चार साल तक चलता रहा खेल: सेल्समैन ने कैसे किया लाखों का खाद घोटाला, सिस्टम बना मूकदर्शक”
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार)
जिले के चौरई विकासखंड अंतर्गत गोपालपुर सेवा सहकारी समिति में सामने आया खाद घोटाला अब केवल अनियमितता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक खेल के रूप में उभर रहा है। आरोप है कि समिति में पदस्थ सेल्समैन ने पिछले करीब चार वर्षों तक खाद वितरण की आड़ में लाखों रुपये का गबन किया और पूरी व्यवस्था को चकमा देता रहा।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए सेल्समैन ने सबसे पहले परमिट आधारित वितरण प्रणाली को दरकिनार किया। किसानों के नाम पर जारी होने वाले परमिट का उपयोग किए बिना ही दो ट्रक से अधिक खाद को निजी लोगों को बेच दिया गया। इस दौरान न तो सही रिकॉर्ड रखा गया और न ही बिक्री की राशि समिति के खाते में जमा की गई।
कैसे हुआ घोटाला – समझिए पूरा खेल:
खाद का स्टॉक समिति में दर्ज रहता था, लेकिन वितरण रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया
किसानों के नाम पर फर्जी या अधूरे एंट्री बनाए गए
बिना परमिट खाद सीधे निजी व्यक्तियों को बेच दी गई
प्राप्त रकम को बैंक में जमा करने के बजाय निजी उपयोग में लिया गया
ERP सिस्टम में एंट्री छिपाने या देरी से दर्ज करने की कोशिश की गई
बताया जा रहा है कि यदि ERP (Enterprise Resource Planning) सिस्टम की जांच नहीं होती, तो यह मामला कभी सामने ही नहीं आता। सॉफ्टवेयर ऑडिट में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद ही पूरे घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
जांच के बाद ‘मैनेजमेंट’ का खेल!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब जिला स्तर से अधिकारी जांच के लिए पहुंचे, तब भी कार्रवाई की बजाय मामला दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं। आरोप है कि सेल्समैन, समिति प्रबंधक और कुछ अधिकारियों के बीच मिलीभगत से पूरे मामले को “मैनेज” कर दिया गया।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक कुंडा स्तर पर कराई गई जांच में अनियमितताएं सामने आने के बावजूद, न तो कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही किसी पर एफआईआर दर्ज की गई।
रकम जमा कर बचने की कोशिश
जैसे ही मामला उजागर हुआ, संबंधित सेल्समैन ने जल्दबाजी में पूरी या आंशिक राशि बैंक में जमा कर दी। लेकिन नियमों के जानकारों का साफ कहना है कि “राशि जमा करना अपराध खत्म नहीं करता, बल्कि यह गबन की पुष्टि करता है।”
सबसे बड़ा सवाल:
4 साल तक यह घोटाला चलता रहा, जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
बिना परमिट खाद वितरण कैसे संभव हुआ?
जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है?
स्थानीय लोगों में आक्रोश
गांव और क्षेत्र में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि एक तरफ उन्हें खाद के लिए भटकना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार लोग ही कालाबाजारी कर रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर
मामला उजागर होने के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस घोटाले पर सख्त रुख अपनाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।







