“नियमों को ताक पर? शिक्षक को बार-बार छात्रावास अधीक्षक बनाने पर उठे सवाल”
छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
जनजातीय कार्य विभाग में इन दिनों नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए एक शिक्षक (चौरई अधीक्षक)को लगातार छात्रावास अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ किया जा रहा है, जबकि उनके कार्यकाल और रिकॉर्ड को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित शिक्षक को पिछले कई वर्षों से विभिन्न छात्रावासों में अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी दी जाती रही है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ पूर्व में लापरवाही के आरोप लगे और विभागीय कार्रवाई भी हुई, जिसमें निलंबन जैसी कार्यवाही शामिल रही। इसके बावजूद उन्हें बार-बार उसी प्रकार की जिम्मेदारियों पर नियुक्त किया जाना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
जानकारों का कहना है कि छात्रावास अधीक्षक का पद संवेदनशील होता है, जिसमें विद्यार्थियों की देखरेख, अनुशासन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी शामिल होती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है।
विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि संबंधित अधिकारी की “विशेष कृपा” के चलते यह नियुक्तियां लगातार होती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
नियम क्या कहते हैं?
सामान्यतः छात्रावास अधीक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए विभागीय दिशा-निर्देश और पात्रता मापदंड तय होते हैं। यदि इनका पालन नहीं किया जाता है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जांच की मांग तेज
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होना चाहिए।
विभाग का पक्ष:
इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध सूचनाओं एवं सूत्रों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)







