दावों की पोल: 15 अप्रैल से गेहूं खरीदी, लेकिन केंद्रों पर तैयारी शून्य — हजारों किसान असमंजस में
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार)।
जिले में 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल रही है। खरीदी शुरू होने में अब महज दो दिन शेष हैं, इसके बावजूद न तो केंद्रों पर बारदाना पहुंच पाया है और न ही स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया पटरी पर आ सकी है। ऐसे में हजारों पंजीकृत किसान असमंजस की स्थिति में हैं।
खरीदी से पहले ही सिस्टम फेल, किसान दूर
प्रशासन द्वारा सभी खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। पोर्टल पर सन्नाटा पसरा हुआ है और स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई है। पहले ही दिन एक भी किसान द्वारा स्लॉट बुक नहीं किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि जब केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं और बारदाना तक नहीं पहुंचा, तो वे अपनी उपज लेकर जोखिम क्यों उठाएं।
मंडी में औने-पौने दाम पर बिक रहा गेहूं
खरीदी में देरी का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है।
मंडी में रोजाना 20 से 25 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो रही है, जहां किसान मजबूरी में समर्थन मूल्य से कम दाम पर फसल बेच रहे हैं। अब तक लाखों क्विंटल गेहूं की खरीदी हो चुकी है, लेकिन वह सरकारी खरीदी केंद्रों के बजाय मंडी के माध्यम से हुई है।
बारदाने की भारी किल्लत, लक्ष्य अधर में
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इस वर्ष लाखों मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए हजारों बारदाना गठानों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में उपलब्धता बेहद कम है।
लक्ष्य के मुकाबले बारदाने की आपूर्ति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे पूरी व्यवस्था अधर में लटकी हुई है।
चना खरीदी भी ठप, भरोसा टूटा
केवल गेहूं ही नहीं, चना खरीदी की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। अब तक चना समर्थन मूल्य पर खरीदा नहीं जा सका है। इससे किसानों का सरकारी खरीदी प्रणाली पर भरोसा लगातार कमजोर होता जा रहा है।
अधिकारी का दावा — “तैयारी जारी, बारदाना रास्ते में”
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 15 अप्रैल से खरीदी शुरू करने की तैयारी जारी है। बारदाने का ऑर्डर दिया जा चुका है और जल्द ही इसकी आपूर्ति केंद्रों तक पहुंच जाएगी।
किसानों की मांग — नुकसान की भरपाई हो
भारतीय किसान संघ और संयुक्त कृषक संगठनों ने खरीदी में देरी को लेकर सरकार से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर खरीदी शुरू होती, तो किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गई है। यदि जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो हजारों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खरीदी शुरू होने से पहले ही सिस्टम की सुस्ती ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







