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छिंदवाड़ा में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावासों का बड़ा खेल…! वार्डन 8 से 10 साल से एक ही जगह जमीं हुई

छिंदवाड़ा में कस्तूरबा छात्रावासों का बड़ा खेल…!

छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार )
कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, जो ग्रामीण बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए बनाए गए थे, अब स्थायी पोस्टिंग का अड्डा बनते नजर आ रहे हैं। छिंदवाड़ा जिले के कई छात्रावासों में वार्डन 8 से 10साल से एक ही जगह जमीं हुई हैं, जबकि नियम के मुताबिक वार्डन का कार्यकाल सिर्फ 3 साल निर्धारित है।
सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने करीब दो साल पहले वार्डनों के बदलाव के निर्देश भी दिए थे, लेकिन जिले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिछले साल जिला शिक्षा केंद्र ने वार्डन के अतिरिक्त प्रभार के लिए आवेदन भी मांगे थे, मगर प्रक्रिया कागजों में ही सिमटकर रह गई।
चर्चा यह भी है कि कुछ छात्रावासों में वर्षों से जमीं वार्डनों को विभागीय संरक्षण मिल रहा है। परासिया के कापरवाड़ी, जुन्नारदेव के खुमकल और नदौरा जैसे छात्रावासों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जहां लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब नियम 3 साल का है तो 8–10 साल से एक ही वार्डन क्यों?

अब बड़ा सवाल
जब नियम 3 साल का है तो 8–10 साल से एक ही वार्डन क्यों?
क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर विभागीय संरक्षण का खेल?
जिला परियोजना समन्वयक का कहना है कि नए सत्र में नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
लेकिन लोगों का सवाल अभी भी वही है —
क्या इस बार सच में बदलाव होगा या फिर छात्रावासों में ‘स्थायी कब्जा’ ऐसे ही चलता रहेगा?
मामला बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा है… इसलिए पारदर्शिता जरूरी है।


क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर विभागीय सांठगांठ?
इस पूरे मामले में जिला परियोजना समन्वयक का कहना है कि नए सत्र में नई व्यवस्था लागू की जाएगी और प्रक्रिया के तहत महिला शिक्षिकाओं को अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा।
लेकिन फिलहाल सवाल यही है कि क्या इस बार सच में बदलाव होगा या फिर सब कुछ पहले की तरह ही चलता रहेगा…?