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बंजर जमीन से समृद्धि की मिसाल:- हर्रई के किसान पुनरलाल इनवाती ने रची नई सफलता की कहानी


छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा)।
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन्हीं प्रयासों का सकारात्मक परिणाम छिंदवाड़ा जिले के हर्रई विकासखंड के जनजातीय किसान पूरनलाल इनवाती की सफलता की कहानी के रूप में सामने आया है, जिन्होंने अपनी मेहनत, नवाचार और समेकित कृषि प्रणाली से बंजर जमीन को समृद्ध खेत में बदल दिया।


पथरीली जमीन को बनाया उपजाऊ
हर्रई के 57 वर्षीय किसान पूरनलाल इनवाती ने करीब सात वर्षों की मेहनत से अपनी 6 एकड़ पथरीली और बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया। पहले खेत में पानी की भारी कमी थी और दो ट्यूबवेल होने के बावजूद गर्मियों में पानी सूख जाता था। इसके बाद उन्होंने खेत में तालाब और कूप रिचार्ज पिट का निर्माण कराया, जिससे जमीन का जलस्तर बढ़ा और अब गर्मियों में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता है।


खेत तालाब से खुली आय की नई राह
खेत में बने तालाब ने इनवाती के लिए आय के नए रास्ते खोल दिए। उन्होंने तालाब में मछली पालन शुरू किया और साथ ही जिले में पहली बार मखाने की खेती का प्रयोग भी किया। मखाना उत्पादन के लिए उन्होंने बिहार के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र से प्रशिक्षण लिया है और इस वर्ष पहली बार अपने तालाब में इसकी खेती शुरू की है।


पानी को सहेजा तो खुशहाली खेतों तक आ गई,
तालाब बना तो मेहनत भी समृद्धि में बदल गई।”
मछली पालन से भी बढ़ी आय
आत्मा योजना के तहत वर्ष 2021-22 में आधा एकड़ के खेत तालाब में रोहू और कतला मछलियों का पालन शुरू किया गया। अच्छे परिणाम मिलने पर अगले वर्ष उन्होंने रोहू, कतला, मृगल, सिल्वर कार्प, बिग हेड कार्प, पॉपलेट और ग्रास कार्प सहित सात प्रजातियों के लगभग 45 लाख मत्स्य बीज डाले। इससे पिछले वर्ष करीब 1.20 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
समेकित खेती से लाखों की कमाई
पूरनलाल इनवाती ने खेती को बहुआयामी बनाते हुए समेकित कृषि प्रणाली अपनाई है। वे खेती के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन भी कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती के तहत वे मक्का, बैंगन और टमाटर उगा रहे हैं, वहीं ड्रिप सिंचाई से एक एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं, जिससे लगभग 6.50 लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है।
उनके खेत में आम, आंवला, मौसंबी, कटहल, नारियल, एप्पल बेर, ड्रैगन फ्रूट, काजू, लौंग, इलायची, तेजपत्ता, काली मिर्च और बादाम जैसे पौधों का भी रोपण किया गया है।
फल और सब्जी उत्पादन से लगभग 8.50 लाख रुपये की आय
पशुपालन से करीब 90 हजार रुपये
मत्स्य पालन से लगभग 1.20 लाख रुपये
फसल उत्पादन से करीब 85 हजार रुपये
इस प्रकार समेकित खेती के माध्यम से उन्हें लगभग 11.45 लाख रुपये वार्षिक आय प्राप्त हो रही है, जिसमें करीब 10 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
शासकीय योजनाओं से मिला सहयोग
पूरनलाल इनवाती को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिला है। इनमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन, मनरेगा के तहत खेत तालाब, मेड़ बंधान, मुर्गी पालन शेड निर्माण और नंदन फलोद्यान जैसी योजनाएं शामिल हैं। साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और आत्मा योजना के तहत प्रशिक्षण एवं कृषक भ्रमण का भी लाभ मिला।
अन्य किसानों को भी कर रहे प्रेरित
इनवाती ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किया है और वे फार्मर मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
पुरस्कार और सम्मान
प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2025 में उन्हें मध्यप्रदेश स्तर पर प्रथम पुरस्कार और 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली। इसके अलावा आत्मा योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ कृषक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके खेत का भ्रमण सांसद विवेक बंटी साहू, कलेक्टर हरेंद्र नारायण और कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी किया है।


जो किसान प्रकृति के साथ चलना सीख जाता है,
वही खेतों में समृद्धि की नई कहानी लिख जाता है।”
आज पूरनलाल इनवाती की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और समेकित कृषि प्रणाली अपनाए तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय अर्जित कर सकता है। उनकी सफलता क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।