Home CITY NEWS कलेक्टर से शिकायत करना छात्राओं को पड़ा महंगा!

कलेक्टर से शिकायत करना छात्राओं को पड़ा महंगा!

कलेक्टर से शिकायत करना छात्राओं को पड़ा महंगा!

शिकायत के बाद छात्राओं के पालकों को थमाया नोटिस, छात्रावास से निष्कासन की कार्रवाई की चेतावनी

परासिया। आदिवासी कन्या छात्रावास पगारा में कथित अनियमितताओं को लेकर कलेक्टर से शिकायत किए जाने के बाद अब छात्राओं के पालकों को नोटिस जारी किए जाने का मामला सामने आया है। छात्रावास अधीक्षिका द्वारा पालकों को नोटिस दिए जाने और छात्राओं को छात्रावास से निष्कासित करने की कार्रवाई की चेतावनी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राप्त समाचार के अनुसार, ग्राम मोरदाना निवासी एक छात्रा के पालक को छात्रावास अधीक्षिका रजना शेंडे द्वारा नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि छात्रा ने 1 और 3 अक्टूबर को अधीक्षिका की अनुमति के बिना छात्रावास से बाहर जाने का कथित कृत्य किया। इसे अनुशासनहीनता बताते हुए पालक से जवाब मांगा गया है।

बताया गया है कि स्कूल से परासिया एवं बड़कुही जाने के साथ जनविश्वास अभियान के शिविर में जिला कलेक्टर के समक्ष छात्रावास की शिकायत किए जाने का मामला भी सामने आया था। इसके बाद छात्राओं के पालकों को नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।

शिकायत करने पर कार्रवाई या अनुशासनात्मक प्रक्रिया?

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत करने वाली छात्राओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है, या नोटिस जारी करने के पीछे केवल अनुशासन संबंधी कारण हैं? यदि छात्रावास में अनियमितताओं को लेकर छात्राओं ने अपनी बात अधिकारियों के सामने रखी है, तो उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होना भी आवश्यक है।

छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, भोजन, सुविधाओं और अनुशासन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। शिकायतों के बाद छात्राओं या उनके पालकों पर किसी प्रकार का अनुचित दबाव न बने, यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल?

मामले में सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, परासिया तथा जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के कारणों, छात्राओं की शिकायतों और छात्रावास की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन छात्रावास की शिकायतों की जांच कर छात्राओं को राहत दिलाता है या मामला नोटिस और जवाब तक ही सीमित रह जाता है।

नोट: छात्रावास अधीक्षिका और संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।