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स्वामित्व योजना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 146 परिवीक्षाधीन पटवारियों को बर्खास्तगी के नोटिस…

स्वामित्व योजना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 146 परिवीक्षाधीन पटवारियों को बर्खास्तगी के नोटिस

36 नियमित पटवारी निलंबित, एक सप्ताह में विभागीय जांच पूरी करने के निर्देश

छिंदवाड़ा। स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। योजना के कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर जिले में पदस्थ 146 परिवीक्षाधीन पटवारियों को सेवा से बर्खास्त करने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वहीं, लापरवाही के आरोप में 36 नियमित पटवारियों को अब तक निलंबित किया जा चुका है। प्रशासन की इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति है।

146 परिवीक्षाधीन पटवारियों पर सेवा समाप्ति की तलवार

स्वामित्व योजना के कार्यों में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने 114 परिवीक्षाधीन पटवारियों को सेवा से बर्खास्त करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किए हैं। इससे एक दिन पहले 32 अन्य परिवीक्षाधीन पटवारियों को भी बर्खास्तगी के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इस तरह अब तक कुल 146 परिवीक्षाधीन पटवारी कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। प्रशासन के अनुसार, बर्खास्तगी संबंधी आदेशों की तामील कराने और संबंधित पटवारियों के बस्ते वापस लेने की प्रक्रिया भी की जा रही है।

36 नियमित पटवारी निलंबित

योजना के कार्यों में लापरवाही पर 25 नियमित पटवारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इससे पहले 11 नियमित पटवारी निलंबित किए जा चुके थे। इस प्रकार निलंबित नियमित पटवारियों की कुल संख्या 36 हो गई है।

एक सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश

कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि संबंधित पटवारियों के विरुद्ध विभागीय जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। प्रशासन के अनुसार, जांच के उपरांत नियमित पटवारियों की सेवा समाप्ति के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि स्वामित्व योजना के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अन्य पटवारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

अब निगाहें विभागीय जांच पर: जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी कर कितने मामलों में अंतिम निर्णय लिया जाता है और स्वामित्व योजना के लंबित कार्यों में कितनी तेजी आती है।