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सूखे की आहट से किसान बेहाल, छिंदवाड़ा को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

सूखे की आहट से किसान बेहाल, छिंदवाड़ा को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

मक्का-सोयाबीन की फसल पर अल्पवर्षा की मार, कांग्रेस ने तत्काल सर्वे, मुआवजा और फसल बीमा की उठाई आवाज

छिंदवाड़ा। अल्पवर्षा से खरीफ की फसलों पर मंडराए संकट और आगामी रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी को लेकर कांग्रेस ने सरकार से छिंदवाड़ा जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। जिला कांग्रेस और किसान कांग्रेस का कहना है कि बारिश की कमी ने किसानों की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। खेतों में खड़ी मक्का और सोयाबीन की फसल नुकसान की मार झेल रही है, वहीं आने वाले रबी सीजन के लिए भी किसानों के सामने सिंचाई के पानी का संकट खड़ा हो गया है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, जिले के किसानों को खरीफ सीजन में पर्याप्त बारिश नहीं मिलने से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर सितंबर में आंधी-तूफान से कई क्षेत्रों में फसलें गिरने और खराब होने से अतिरिक्त नुकसान हुआ है। सोयाबीन की फसल में कम वर्षा के साथ यलो मोजेक बीमारी से नुकसान का भी दावा किया गया है।

‘खेत में फसल, लेकिन किसान के हाथ खाली’

कांग्रेस का कहना है कि मक्का उत्पादक किसानों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। कम बारिश के कारण मक्का का उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रहने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद किसानों को मंडियों में उचित भाव नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक कई किसानों को मक्का 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचने की मजबूरी बनी हुई है।

कांग्रेस ने मक्का की समर्थन मूल्य पर 2410 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी के साथ 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग भी उठाई है, ताकि लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को राहत मिल सके।

रबी की फसल पर भी संकट, सिंचाई का पानी बना सबसे बड़ा सवाल

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि जिले के कई जलाशयों, तालाबों और स्टॉप डैम में पर्याप्त जल उपलब्धता नहीं होने से रबी फसलों की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। माचागोरा, कन्हरगांव और सरोठ सहित अन्य जलाशयों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि यदि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हुआ तो किसानों के सामने रबी की फसल लेने का संकट पैदा हो सकता है।

सितंबर में जिला प्रशासन की ओर से भी कम बारिश के मद्देनजर आगामी महीनों में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था की तैयारी पर जोर दिया गया था।

कर्ज, बिजली बिल और बच्चों की फीस में राहत की मांग

कांग्रेस ने सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों के कर्ज और बिजली बिल में राहत देने की मांग की है। साथ ही किसानों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने, कम पानी में होने वाली सरसों और चने की फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीज पर्याप्त मात्रा में अनुदान पर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।

इसके अलावा नलकूप और कुएं खोदने के लक्ष्य बढ़ाकर किसानों को स्वीकृति देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है।

तत्काल हो फसल नुकसान का सर्वे

कांग्रेस ने मांग की है कि मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ फसलों का तत्काल मैदानी सर्वे कराया जाए। सर्वे के आधार पर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा और फसल बीमा की राशि दिलाई जाए। कांग्रेस का कहना है कि किसानों की वास्तविक स्थिति कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि खेतों में पहुंचकर किए गए सर्वे से सामने आएगी।

जिले में अल्पवर्षा की स्थिति को लेकर हाल में किसानों को मौसम के अनुरूप फसल एवं किस्म चयन और कम बारिश से निपटने संबंधी कृषि सलाह देने के लिए कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा भी आयोजित की गई थी।

मुख्यमंत्री और कलेक्टर को भेजा ज्ञापन

कांग्रेस के अनुसार, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे, पांढुर्णा जिला प्रभारी गंगाप्रसाद तिवारी, जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह, गुरूचरण खरे, राजीव तिवारी, धर्मेन्द्र सोनू मागो, अजय पटेल, दिगम्बर ठाकरे, मनोज वानखेड़े और शैलेन्द्र उर्फ शैलू सेंगर सहित प्रतिनिधिमंडल ने किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और कलेक्टर को ज्ञापन प्रेषित किया है।

कांग्रेस ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ भी छिंदवाड़ा और पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठा चुके हैं। पांढुर्णा में भी हाल ही में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कम बारिश से प्रभावित खरीफ फसलों का हवाला देते हुए सूखा घोषित करने, सर्वे, मुआवजा और फसल बीमा सहित राहत की मांग रखी थी।

अब सवाल—सरकार किसानों के खेत तक कब पहुंचाएगी राहत?

बारिश की कमी, खरीफ फसलों में नुकसान और रबी के लिए सिंचाई संकट के बीच किसानों की नजर अब प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। कांग्रेस ने मांग की है कि स्थिति का तत्काल आकलन कर किसानों को राहत देने के लिए ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि खरीफ में नुकसान झेल चुके किसान रबी सीजन में भी संकट में न फंसें।