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कलेक्टर के निर्देश के बाद सवाल—ढाबों में शराब बिक्री पर कब होगी प्रभावी कार्रवाई?

कलेक्टर के निर्देश के बाद सवाल—ढाबों में शराब बिक्री पर कब होगी प्रभावी कार्रवाई?

जिला मुख्यालय से लेकर गांवों तक ढाबों की जांच पर उठे सवाल, सूचना होने के बावजूद कार्रवाई कितनी प्रभावी?

छिंदवाड़ा। जिले में ढाबों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शराब की अवैध बिक्री एवं सेवन को लेकर प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाते रहे हैं। कलेक्टर ने भी संबंधित अधिकारियों को ढाबों की जांच कर अवैध रूप से शराब की बिक्री पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब इन निर्देशों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर इनका कितना असर दिखाई देता है?

जिला मुख्यालय से लेकर तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों तक संचालित ढाबों को लेकर स्थानीय स्तर पर शराब की अवैध बिक्री की शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिन स्थानों के संबंध में पुलिस और आबकारी अमले तक शिकायतें या सूचनाएं पहुंचती रही हैं, वहां नियमित और निष्पक्ष जांच कितनी हो रही है?

दो-चार कार्रवाई या लगातार निगरानी?

अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ केवल एक-दो स्थानों पर कार्रवाई कर मामला समाप्त मान लेना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जरूरत इस बात की है कि जिलेभर में ढाबों की नियमित, औचक और निष्पक्ष जांच हो तथा यदि कहीं अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मध्यप्रदेश में हाल में आबकारी विभाग को अवैध शराब और अवैध अहातों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा शिकायतों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

क्या जिम्मेदारी तय होगी?

सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी ढाबे पर लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिलती हैं और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो केवल विक्रेता पर कार्रवाई होगी या उस पूरे मामले में जिम्मेदारी और निगरानी की भूमिका भी तय की जाएगी?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी ऐसे संभावित स्थानों की सूची तैयार कर लगातार निगरानी कर रहे हैं या फिर किसी शिकायत अथवा बड़े मामले के सामने आने के बाद ही कार्रवाई की जाती है?

कलेक्टर के निर्देश की होगी अग्निपरीक्षा

अब देखना यह है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद संबंधित विभाग जिले के ढाबों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए कितनी व्यापक जांच करते हैं। क्या जिला मुख्यालय, तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से कार्रवाई होगी? क्या अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होने पर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किए जाएंगे? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या कार्रवाई लगातार जारी रहेगी या कुछ कार्रवाई के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

फिलहाल गेंद पुलिस और आबकारी विभाग के पाले में है। यदि विभाग को किसी स्थान पर अवैध शराब बिक्री की विश्वसनीय सूचना मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना ही प्रशासनिक निर्देशों की वास्तविक परीक्षा होगी।

नोट: ढाबों पर अवैध शराब बिक्री से संबंधित बातें स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों/सूचनाओं के आधार पर सवाल के रूप में रखी गई हैं। किसी व्यक्ति, ढाबा संचालक या शराब ठेकेदार की संलिप्तता को बिना आधिकारिक जांच के तथ्य के रूप में नहीं माना जा रहा है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।