आखिर किसकी लापरवाही से गई मजदूर की जान?
सेप्टिक टैंक में गैस रिसाव से एक मजदूर की मौत, दूसरा गंभीर; श्रम विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
तामिया/छिंदवाड़ा। तामिया के कुर्सीढाना गांव में सेप्टिक टैंक में गैस रिसाव से हुई एक मजदूर की मौत ने निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवनिर्मित मकान के सेप्टिक टैंक की सेंटिंग खोलने के दौरान दो मजदूर गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। इनमें मोहन कुमरे की मौत हो गई, जबकि दियालाल धुर्वे को गंभीर हालत में छिंदवाड़ा जिला अस्पताल रेफर किया गया।

हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार व्यवस्थाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी कितनी होती है? क्या सेप्टिक टैंक में काम शुरू करने से पहले गैस की जांच, वेंटिलेशन और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे?
श्रम विभाग की निगरानी पर भी सवाल
मजदूर की मौत के बाद श्रम विभाग की निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या विभाग द्वारा ऐसे निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच की जाती है? यदि निरीक्षण की व्यवस्था है तो कुर्सीढाना जैसे मामलों में सुरक्षा मानकों की जांच कब और किस स्तर पर हुई?

फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन एक मजदूर की जान जाने के बाद जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग उठ रही है।
अब देखना यह है कि प्रशासन और श्रम विभाग इस घटना को महज हादसा मानकर आगे बढ़ता है या सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई करता है।








