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छात्रावासों में बदली तस्वीर: योग, पौष्टिक भोजन और नियमित निगरानी से आदिवासी विद्यार्थियों को मिल रहा बेहतर वातावरण..

छात्रावासों में बदली तस्वीर: योग, पौष्टिक भोजन और नियमित निगरानी से आदिवासी विद्यार्थियों को मिल रहा बेहतर वातावरण
मंत्री के निर्देशों के बाद छिंदवाड़ा/पांढुर्णा जिले के छात्रावासों में व्यवस्था में सुधार, भोजन की गुणवत्ता की हो रही ऑनलाइन निगरानी

रिपोर्ट/ठा.रामकुमार राजपूत

मोबाइल-8839760279

छिंदवाड़ा/पांढुर्णा। जनजाति कार्य विभाग के मंत्री के निर्देशों के बाद छिंदवाड़ा/पांढुर्णा जिले के आदिवासी छात्रावासों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब छात्रावासों में विद्यार्थियों के भोजन की गुणवत्ता से लेकर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
छात्रावासों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग कराया जा रहा है, वहीं बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। भोजन परोसने से पहले उसकी फोटो विभागीय पोर्टल पर दर्ज किए जाने से व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को भी बढ़ावा मिला है।

छिंदवाड़ा के छात्रावासों में भी बदली व्यवस्था की तस्वीर
रोजाना भोजन की फोटो पोर्टल पर अपलोड, आदिवासी विद्यार्थियों को योग का प्रशिक्षण..
जनजाति कार्य विभाग के मंत्री के निर्देशों के बाद जिले के आदिवासी छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य को लेकर व्यवस्थाओं में बदलाव दिखाई देने लगा है। अब जिले के प्रत्येक छात्रावास में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की फोटो प्रतिदिन विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इसके साथ ही छात्रावासों में बच्चों को नियमित रूप से योग भी कराया जा रहा है।
जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले के प्रत्येक छात्रावास में भोजन की फोटो रोजाना पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इसके माध्यम से भोजन व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। विद्यार्थियों को योग सिखाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पढ़ाई के साथ उनके स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान रहे।
भोजन से लेकर स्वास्थ्य तक निगरानी
छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए भोजन उनकी दैनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में भोजन की फोटो पोर्टल पर दर्ज किए जाने से अधिकारियों को व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी का माध्यम मिल रहा है। वहीं योग को छात्रावास की दिनचर्या से जोड़ने से विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर ध्यान देने की पहल की गई है।
निर्देशों का असर जमीन पर
मंत्री के निर्देशों के बाद भोजन की गुणवत्ता की निगरानी और योग जैसी गतिविधियों को छात्रावासों की नियमित व्यवस्था में शामिल किया जाना विभाग की कार्यप्रणाली में हो रहे बदलाव को दर्शाता है। छिंदवाड़ा में विभाग द्वारा प्रत्येक छात्रावास तक इस व्यवस्था को पहुंचाने का दावा किया गया है।
नियमित जांच से व्यवस्था में आया बदलाव
जनजाति कार्य विभाग पांढुर्ना के सहायक संचालक उमेश सतनकर के अनुसार पांढुर्णा जिले के छात्रावासों की नियमित जांच कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, छात्रावास की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उनका कहना है कि नियमित निगरानी का परिणाम अब छात्रावासों में दिखाई देने लगा है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही उनके स्वास्थ्य और दिनचर्या को बेहतर बनाने के लिए योग की कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं।
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और अनुशासन पर भी जोर
छात्रावास केवल विद्यार्थियों के रहने की जगह नहीं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में योग जैसी गतिविधियों को नियमित दिनचर्या में शामिल किए जाने से विद्यार्थियों को शारीरिक सक्रियता, एकाग्रता और अनुशासन की दिशा में लाभ मिलने की उम्मीद है।
विभाग की यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि आदिवासी विद्यार्थियों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बेहतर भोजन, स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में शामिल किया जा रहा है।
निगरानी से बढ़ी जवाबदेही
भोजन की फोटो पोर्टल पर दर्ज होने और छात्रावासों की नियमित जांच की व्यवस्था से जिम्मेदार अधिकारियों एवं छात्रावास प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल रही है। यदि यह निगरानी व्यवस्था लगातार प्रभावी ढंग से जारी रहती है तो छात्रावासों में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
छिंदवाड़ा/ पांढुर्णा जिले के छात्रावासों में योग, गुणवत्तापूर्ण भोजन और नियमित निरीक्षण की यह पहल आदिवासी विद्यार्थियों के हित में व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में सामने आ रही है।