ई-टोकन मिलने के बाद भी खाद के लिए भटक रही महिला किसान
चौरई के रघुवंशी एग्रो जंक्शन पर खाद नहीं देने का आरोप, दो-तीन दिन से चक्कर काट रही कृषक…
छिंदवाड़ा/चौरई। जिले में इन दिनों किसान यूरिया खाद के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। ई-टोकन बुक होने के बाद भी किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला चौरई विकासखंड के चमनधाटी स्थित रघुवंशी एग्रो जंक्शन से सामने आया है, जहां एक महिला कृषक को ई-टोकन जनरेट होने के बावजूद खाद नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार बरेलीपार माल निवासी महिला कृषक सीमा वर्मा ने 8 सितंबर 2026 को ई-टोकन बुक किया था। इसके बाद से महिला कृषक का परिवार खाद लेने के लिए संबंधित कृषि केंद्र के चक्कर काट रहा है। परिवार का आरोप है कि जब वे ई-टोकन के आधार पर यूरिया खाद लेने पहुंचे तो दुकान संचालक द्वारा खाद उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई और कहीं अन्य से खाद लेने के लिए कहा गया।
परिवार के मुताबिक, खाद मिलने की उम्मीद में वे दोबारा संबंधित दुकान पर पहुंचे, लेकिन दुकान बंद मिली। इससे ई-टोकन की निर्धारित अवधि समाप्त होने को लेकर किसान परिवार की चिंता बढ़ गई है। किसान परिवार का कहना है कि यदि टोकन की तारीख समाप्त हो गई तो आखिर उन्हें खाद कैसे मिलेगी?
कृषि अधिकारियों को शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
किसान परिवार का कहना है कि मामले की जानकारी चौरई स्थित वरिष्ठ कृषि कार्यालय में भी दी गई है। इसके बाद उपसंचालक कृषि से भी फोन पर संपर्क कर समस्या बताई गई। परिवार के अनुसार, अधिकारी द्वारा मामले को देखने का आश्वासन दिया गया, लेकिन शिकायत के बाद भी करीब दो दिन बीतने के बावजूद खाद उपलब्ध नहीं हो सकी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि ई-टोकन व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना है, तो टोकन मिलने के बाद भी किसान खाद के लिए भटकने को क्यों मजबूर हैं? यदि संबंधित विक्रेता के पास खाद उपलब्ध नहीं थी तो ई-टोकन धारक किसान को खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की?
टोकन की तारीख खत्म होने से पहले समाधान की मांग
किसान परिवार ने कृषि विभाग से मांग की है कि ई-टोकन की अवधि समाप्त होने से पहले मामले का निराकरण कर महिला कृषक को यूरिया खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसे दोबारा टोकन और वितरण प्रक्रिया में परेशान न होना पड़े।
नोट: यह समाचार किसान परिवार द्वारा लगाए गए आरोप एवं उपलब्ध जानकारी के आधार पर है। मामले में संबंधित खाद विक्रेता एवं कृषि विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








