Home AGRICULTURE जैविक हाट बाजार अधिकारियों की मौजूदगी और फोटो तक तो नहीं सीमित?

जैविक हाट बाजार अधिकारियों की मौजूदगी और फोटो तक तो नहीं सीमित?

जैविक हाट बाजार अधिकारियों की मौजूदगी और फोटो तक तो नहीं सीमित?

शहरवासियों को मिल रहे जैविक उत्पाद, लेकिन बड़ा सवाल—क्या गांव-गांव तक पहुंच रहा जैविक खेती का प्रचार-प्रसार?

हर शनिवार-रविवार सज रहा जैविक हाट, अधिकारियों की मौजूदगी भी दिख रही; किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की जरूरत पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। छिंदवाड़ा में भी प्रत्येक शनिवार और रविवार जैविक हाट बाजार सजाया जा रहा है, जहां किसान प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद लेकर पहुंच रहे हैं और शहरवासी उनकी खरीदारी कर रहे हैं। यह पहल निश्चित रूप से किसानों और उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक मानी जा सकती है।

लेकिन इस व्यवस्था के बीच अब एक बड़ा सवाल भी सामने आ रहा है—क्या जैविक हाट बाजार और जैविक खेती का अभियान केवल शहर और सप्ताहांत के आयोजनों तक सीमित होकर तो नहीं रह गया है?

जनहित में यह जानना जरूरी है कि कृषि विभाग द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार के लिए जिले के दूरस्थ गांवों तक किस स्तर पर पहुंच बनाई जा रही है। क्या छोटे और सीमांत किसानों को जैविक खेती की तकनीक, उसके फायदे, बाजार और सरकारी योजनाओं की पर्याप्त जानकारी मिल रही है?

शनिवार-रविवार हाट में मौजूदगी, लेकिन गांवों में कितना प्रचार?

जैविक हाट बाजार में कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी और किसानों का उत्साहवर्धन किया जाना एक सकारात्मक पहल है। अधिकारी किसानों से उत्पाद खरीदकर उनका मनोबल भी बढ़ा रहे हैं।

हालांकि सवाल यह है कि क्या विभाग की सक्रियता केवल हाट बाजार में उपस्थिति और कार्यक्रमों तक सीमित है, या फिर गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित और जागरूक भी किया जा रहा है?

जिले के हजारों किसानों को आज भी जैविक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी योजनाओं, उत्पादन प्रक्रिया, प्रमाणन, बाजार व्यवस्था और संभावित आर्थिक लाभ की विस्तृत जानकारी की आवश्यकता है। ऐसे में विभाग के सामने चुनौती केवल हाट सजाने की नहीं, बल्कि अधिक से अधिक किसानों तक इस अभियान को पहुंचाने की भी है।

रविवार को भी सजा जैविक हाट, किसानों के चेहरे खिले

इधर रविवार को भी शहरवासियों को ताजी, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि उपज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जैविक सब्जी हाट का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसान अपने प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद बिक्री के लिए लेकर पहुंचे।

शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक जैविक सब्जियों और अन्य प्राकृतिक उत्पादों की खरीदारी की। अधिकारियों ने भी किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए सीधे किसानों से उत्पाद खरीदे।

अच्छी बिक्री मिलने से किसानों में उत्साह दिखाई दिया। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से तैयार उनके उत्पादों को शहरवासियों द्वारा पसंद किया जा रहा है, जिससे उन्हें इस खेती को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिल रही है। किसानों ने आगामी रविवार को भी अधिक मात्रा में जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद लेकर हाट में पहुंचने की बात कही है।

पहल अच्छी, लेकिन दायरा बढ़ाने की जरूरत

जैविक हाट बाजार शहरवासियों और जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। लेकिन केवल शहर में बाजार लगाना ही जैविक खेती के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

जरूरत इस बात की है कि कृषि विभाग गांवों तक व्यापक अभियान चलाए, किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करे और उन्हें यह बताए कि—

  • जैविक एवं प्राकृतिक खेती कैसे अपनाई जाए?
  • इसके लिए कौन-कौन सी सरकारी योजनाएं उपलब्ध हैं?
  • उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के क्या तरीके हैं?
  • जैविक उत्पादों के लिए बाजार कहां मिलेगा?
  • छोटे किसानों को इससे वास्तविक आर्थिक लाभ कैसे मिल सकता है?

सवालों के जवाब से बढ़ेगा अभियान पर भरोसा

जनहित में कृषि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में जैविक खेती के प्रचार-प्रसार के लिए हाट बाजार के अलावा कितने गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और कितने किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

क्योंकि सवाल केवल इतना नहीं है कि हर शनिवार और रविवार जैविक हाट बाजार सज रहा है, बल्कि असली सवाल यह है कि क्या जैविक खेती की यह मुहिम शहर की सीमाओं से निकलकर जिले के गांवों और खेतों तक भी उतनी ही मजबूती से पहुंच रही है?

यदि योजना का लाभ हर किसान तक पहुंचेगा, तभी जैविक हाट की तस्वीरों के साथ-साथ धरातल पर भी जैविक खेती की असली तस्वीर बदलती दिखाई देगी।