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सहायक आयुक्त सत्येंद्र मरकाम से नहीं संभल रहा जनजातीय कार्य विभाग? छात्रावासों की बदहाली पर उठे बड़े सवाल

सहायक आयुक्त सत्येंद्र मरकाम से नहीं संभल रहा जनजातीय कार्य विभाग? छात्रावासों की बदहाली पर उठे बड़े सवाल..!
अमरवाड़ा की आदिवासी छात्राएं शिकायत लेकर पहुंचीं कलेक्टर कार्यालय, खराब भोजन और काम कराने के लगाए गंभीर आरोप?


छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग छिंदवाड़ा की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रावासों और आश्रम शालाओं से लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच अब अमरवाड़ा स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती सीनियर कन्या छात्रावास की आदिवासी छात्राओं को अपनी पीड़ा लेकर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा।
सवाल यह है कि आखिर जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र मरकाम की निगरानी में संचालित छात्रावासों की वास्तविक स्थिति क्या है? यदि विभागीय निगरानी व्यवस्था प्रभावी है तो छात्राओं को अपनी समस्याएं लेकर कलेक्टर कार्यालय तक क्यों पहुंचना पड़ रहा है?
छात्राओं का आरोप—खाने में कीड़े, सुविधाओं का अभाव और काम कराने का दबाव
कलेक्टर कार्यालय पहुंची छात्राओं ने छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं के अनुसार भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है और खाने में कीड़े निकलने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ता भी आए छात्रों के साथ

छात्राओं का आरोप है कि छात्रावास अधीक्षिका उनसे झाड़ू-पोछा, बाथरूम की सफाई और अन्य काम कराती हैं। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे कथित रूप से अधीक्षिका के निजी काम भी कराए जाते हैं।
छात्राओं ने अपनी शिकायत में कहा कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विरोध के दौरान छात्राओं ने सवाल उठाया—

छात्राओं के माता पिता भी पहुंचे शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय छिंदवाड़ा

“दो रोटी में कैसे पढ़ें?”
यह सवाल सिर्फ अमरवाड़ा छात्रावास की छात्राओं का नहीं, बल्कि जनजातीय छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
निगरानी करने वाले कार्यालयों में, छात्राएं शिकायत लेकर सड़कों पर!
जनजातीय कार्य विभाग का दायित्व केवल कार्यालयों से फाइलों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, भोजन, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखना भी है।
लेकिन जब छात्राओं को अपनी शिकायत लेकर अमरवाड़ा से छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंचना पड़े तो विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या छात्रावासों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?
क्या अधिकारियों को छात्राओं की समस्याओं की जानकारी नहीं थी?
यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ये सवाल अब जनजातीय कार्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने खड़े हैं।
सहायक आयुक्त छात्रों से नहीं मिले? कार्रवाई का इंतजार
छात्राओं और स्थानीय लोगों के अनुसार शिकायत सामने आने के बाद भी जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र मरकाम छात्राओं से नहीं मिले। साथ ही, समाचार लिखे जाने तक छात्रावास अधीक्षिका के खिलाफ किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
यदि यह स्थिति सही है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर शिकायत लेकर पहुंची आदिवासी छात्राओं की बात सुनने की जिम्मेदारी किसकी है?
बार-बार शिकायतें, फिर भी व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं?
छिंदवाड़ा जिले के जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े छात्रावासों और आश्रम शालाओं को लेकर समय-समय पर भोजन, सुविधाओं, प्रबंधन और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं।
ऐसे में यह मामला केवल एक छात्रावास तक सीमित नहीं माना जा सकता। जरूरत है कि विभाग पूरे जिले के छात्रावासों और आश्रम शालाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए।
अब कलेक्टर और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
आदिवासी छात्राओं की शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि छात्राओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
बड़ा सवाल यही है—
क्या जनजातीय कार्य विभाग बच्चों और छात्राओं की समस्याएं सुनने के बाद जागेगा, या फिर हर छात्रावास की छात्राओं को अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ेगा?
नोट :
इस समाचार में छात्रावास अधीक्षिका एवं विभागीय अधिकारियों के संबंध में उल्लेखित आरोप छात्राओं द्वारा की गई शिकायतों और उनके कथनों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगी। संबंधित अधिकारी एवं अधीक्षिका का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।