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छात्रावास या अधीक्षक का पारिवारिक आवास? देलाखारी छात्रावास की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल..!

छात्रावास या अधीक्षक का पारिवारिक आवास? देलाखारी छात्रावास की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल
मुख्य गेट वर्षों से बंद रखने की शिकायत, छात्रों को खेलकूद और अभिभावकों से मिलने में परेशानी के आरोप

अधीक्षक के परिवार सहित छात्रावास परिसर में रहने की बात क्षेत्र संयोजक ने भी स्वीकार की, नियमों और अनुमति पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा/देलाखारी। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास, देलाखारी की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्रावास, जो आदिवासी विद्यार्थियों के सुरक्षित आवास, अध्ययन और विकास के लिए संचालित किया जाता है, वहां अधीक्षक के कथित रूप से पूरे परिवार के साथ निवास करने की सूत्रों से जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विद्यार्थियों के लिए निर्धारित छात्रावास परिसर का उपयोग किसी अधिकारी के पारिवारिक निवास के रूप में किया जा सकता है? यदि हां, तो इसके लिए किस सक्षम अधिकारी की अनुमति है और विभागीय नियम क्या कहते हैं? इन सवालों का स्पष्ट जवाब विभाग को देना होगा।
छात्रों के लिए छात्रावास, लेकिन मुख्य गेट पर ताला!
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार छात्रावास का मुख्य गेट करीब पांच वर्षों से बंद रखा जा रहा है। आरोप है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी बच्चों से मिलने और बातचीत करने के लिए गेट तक ही सीमित रहना पड़ता है।
यह व्यवस्था विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के हितों के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक बताई जा रही है। ये बात ठीक है कि बाहरी व्यक्ति को अनुमति लेकर ही छात्रावास परिसर में अंदर जाना चाहिए , लेकिन नियम की आड़ में बच्चों की स्वतंत्रता क्यों छीनी जा रही है।

सुविधा पर भी सवाल..
जानकारी का कहना है कि छात्रावास परिसर को चारों ओर से बंद रखने के कारण विद्यार्थियों को खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बनाई गई सुविधाओं की नियमित निगरानी आखिर कौन कर रहा है।
क्षेत्र संयोजक बोले—अधीक्षक परिवार के साथ रहते हैं
मामले को लेकर क्षेत्र संयोजक मनीष बोरकर से दूरभाष पर चर्चा की गई। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि अधीक्षक छात्रावास परिसर में अपने परिवार के साथ रहते हैं।
हालांकि, क्षेत्र संयोजक का कहना है कि उनकी जानकारी के अनुसार इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी नहीं है।
लेकिन इसके बाद सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो अधीक्षक के परिवार सहित निवास की अनुमति, आवास आवंटन और संबंधित विभागीय आदेश सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किए जाते?
निगरानी व्यवस्था पर सवाल—आखिर निरीक्षण में क्या देखा जा रहा है?
छात्रावासों की नियमित निगरानी और व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए विभागीय स्तर पर अधिकारी नियुक्त रहते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुख्य गेट लंबे समय से बंद रहने, विद्यार्थियों को कथित रूप से खेलकूद सुविधाओं में परेशानी होने तथा अधीक्षक के परिवार सहित परिसर में निवास करने जैसे मुद्दों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को है या नहीं।
यदि जानकारी है तो विभाग की ओर से इस संबंध में क्या निर्णय या अनुमति दी गई है? और यदि जानकारी नहीं है तो नियमित निरीक्षण एवं निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने की भी शिकायत
स्थानीय स्तर पर यह शिकायत भी सामने आई है कि अधीक्षक लगभग पांच वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। हालांकि, पदस्थापना और स्थानांतरण से संबंधित वास्तविक स्थिति विभागीय रिकॉर्ड और लागू नियमों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में आवश्यक है कि जनजातीय कार्य विभाग निष्पक्षता से जांच कर यह स्पष्ट करे कि—
अधीक्षक और उनके परिवार के छात्रावास परिसर में निवास की अनुमति किस आधार पर है?
क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश उपलब्ध है?
छात्रावास का मुख्य गेट लंबे समय से बंद रखने के संबंध में क्या व्यवस्था और कारण हैं?
विद्यार्थियों को खेलकूद एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध हो रही हैं या नहीं?
छात्रावास की नियमित निगरानी और निरीक्षण कब-कब किया गया?
विद्यार्थियों के हितों से जुड़े इस मामले में विभागीय जांच और आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

टीप/पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा
इस संबंध में सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग तथा संबंधित छात्रावास अधीक्षक का विस्तृत पक्ष प्राप्त किया जा रहा है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता और समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा। विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेज, अनुमति आदेश अथवा स्पष्टीकरण के आधार पर समाचार को आवश्यकतानुसार अद्यतन किया जाएगा।