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बिछुआ ब्लॉक में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप2009 से अटैचमेंट में शिक्षक, मूल स्कूल में पढ़ाई प्रभावित; उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बाबूगिरी कराने पर उठे सवाल

बिछुआ ब्लॉक में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
2009 से अटैचमेंट में शिक्षक, मूल स्कूल में पढ़ाई प्रभावित; उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बाबूगिरी कराने पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा। जिलें के बिछुआ विकासखंड की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूल में अध्यापन कार्य करने के बजाय दूसरे विद्यालय में अटैचमेंट पर कार्य कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है।
ऐसा ही मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ौसा से सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत पनियारी के ग्राम हेटी स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षक सुरेन्द्र भांगे के लंबे समय से अटैचमेंट पर कार्यरत होने की शिकायत है।
शिकायत के अनुसार, सुरेन्द्र भांगे वर्ष 2009 से बड़ौसा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अटैचमेंट पर कार्य कर रहे हैं और वहां शिक्षकीय दायित्व के बजाय कार्यालयीन/बाबूगिरी से संबंधित कार्य किए जाने का आरोप है। दूसरी ओर, उनकी मूल पदस्थापना वाली ग्राम हेटी प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
मूल स्कूल में शिक्षक की कमी, दूसरे स्कूल में कार्यालयीन काम?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी शिक्षक की मूल पदस्थापना प्राथमिक शाला में है, तो उसे वर्षों तक दूसरे विद्यालय में अटैच रखकर शिक्षकीय कार्य से अलग रखने का औचित्य क्या है? यदि अटैचमेंट की अवधि समाप्त हो चुकी है तो उसे समाप्त कर मूल पदस्थापना वाले स्कूल में वापस क्यों नहीं भेजा गया?
वहीं, यदि विभागीय आदेश के तहत अटैचमेंट जारी रखा गया है तो उस आदेश की वैधता, अवधि और आवश्यकता की भी जांच होना जरूरी है।
क्या कहते हैं नियम और रिकॉर्ड?
मामले में वर्ष 2009 से अब तक जारी किए गए सभी अटैचमेंट आदेश, उनकी अवधि, आदेश जारी करने वाले अधिकारी तथा अटैचमेंट बढ़ाए जाने के कारणों की जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अटैचमेंट के दौरान शिक्षक से किस प्रकार का कार्य लिया गया और क्या वह कार्य उनके पद एवं सेवा नियमों के अनुरूप था।
जनजातीय विभाग की भूमिका पर भी सवाल
यदि लंबे समय से शिक्षक अटैचमेंट पर कार्य कर रहे हैं, जबकि उनकी मूल शाला में शिक्षक की आवश्यकता है, तो विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर इसकी समीक्षा क्यों नहीं की गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण किया और अटैचमेंट की वास्तविक स्थिति की जांच की?
मामले की निष्पक्ष जांच कर सुरेन्द्र भांगे के अटैचमेंट से संबंधित वर्ष 2009 से वर्तमान तक के सभी आदेश, मूल पदस्थापना, उपस्थिति रिकॉर्ड, कार्य आवंटन तथा दोनों स्कूलों की शिक्षक-छात्र स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में अटैचमेंट नियमों के विपरीत या बिना वैध आदेश के जारी पाया जाता है, तो उसे तत्काल समाप्त कर शिक्षक को नियमानुसार मूल पदस्थापना वाले विद्यालय में भेजा जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग वर्षों पुराने इस अटैचमेंट की फाइल खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच करता है या फिर मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है।