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जिंदा बच्चे को सरकारी रिकॉर्ड में मार दिया! स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही ने खोली व्यवस्था की पोल

जिंदा बच्चे को सरकारी रिकॉर्ड में मार दिया! स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही ने खोली व्यवस्था की पोल

जहरीले जंतु के काटने से बचा 14 वर्षीय नैतिक, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हो गई ‘मौत’ — इलाज से लेकर दस्तावेज तक सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
विशेष रिपोर्ट: रामकुमार राजपूत | छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परासिया विकासखंड के ग्राम कचराम निवासी 14 वर्षीय नैतिक पवार, जो जहरीले जंतु के काटने के बाद इलाज कर पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आया था, उसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, अप्रैल माह में नैतिक खेत में खेल रहा था, तभी किसी जंतु ने उसे काट लिया। आशंका के चलते परिजन उसे पहले परासिया सिविल अस्पताल और फिर जिला अस्पताल छिंदवाड़ा लेकर पहुंचे। वहां दो दिन तक उसे भर्ती रखकर सांप के काटने का उपचार और एंटी-वेनम दिया गया। बाद में नैतिक स्वस्थ होकर घर लौट आया।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सत्यापन के लिए नैतिक के घर पहुंची और परिवार को बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में नैतिक की सांप के काटने से मृत्यु दर्ज है तथा मुआवजा प्रक्रिया के लिए दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। यह सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया।


नैतिक के पिता हुकुमचंद पवार का आरोप है कि बाद में पता चला कि बच्चे को सांप नहीं, बल्कि चुहिया ने काटा था। इसके बावजूद जिला अस्पताल में उसे सांप के जहर का उपचार दिया गया। इतना ही नहीं, अस्पताल के रिकॉर्ड में भर्ती और घटना की तारीख भी गलत दर्ज की गई तथा जीवित बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।

यह मामला केवल एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड संधारण और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी जीवित व्यक्ति को मृत दिखाया जा सकता है, तो विभागीय निगरानी और जवाबदेही की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
आखिर जीवित बच्चे को मृत घोषित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
गलत इलाज और रिकॉर्ड की त्रुटि के लिए कौन जवाबदेह होगा?
क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?
भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाएगा?
इस मामले ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।