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जनजातीय विभाग में मरम्मत के नाम पर लाखों का खेल? अंबाडा आश्रम बना भ्रष्टाचार के आरोपों का केंद्र

जनजातीय विभाग में मरम्मत के नाम पर लाखों का खेल? अंबाडा आश्रम बना भ्रष्टाचार के आरोपों का केंद्र
परासिया के आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में मरम्मत कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे
रिपोर्ट – रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284
छिंदवाड़ा /जिले के परासिया विकासखंड में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित आदिवासी छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं में कराए जा रहे मरम्मत कार्य एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान किए जाने के बावजूद भवन की स्थिति जर्जर बनी हुई है। मामले में विभाग के सहायक यंत्री और संबंधित ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।

आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा शाला की छत की स्थिति

मरम्मत पर लाखों खर्च, फिर भी नहीं बदली तस्वीर
स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों के अनुसार पिछले दो वर्षों में आश्रम शाला में कई बार मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए और लाखों रुपये का भुगतान भी किया गया। आरोप है कि एक वर्ष पूर्व भी मरम्मत कार्य के नाम पर लगभग 25 से 30 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन भवन की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार दिखाई नहीं देता। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च हुई है तो उसका असर धरातल पर क्यों नहीं दिख रहा है।

शौचालय की स्थिति देखकर आप समझ सकते हो कैसे हो रही है मरम्मत..?

भौतिक सत्यापन और निरीक्षण पर उठे सवाल
आरोप यह भी हैं कि मरम्मत कार्यों का भुगतान बिना प्रभावी भौतिक सत्यापन और स्थल निरीक्षण के कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई कार्य कागजों में पूर्ण दर्शाए गए, जबकि वास्तविक स्थिति अलग है। इस कारण विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


दूसरे ठेकेदार को भी मिला काम, भुगतान पर विवाद
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले मरम्मत कार्य के बाद उसी भवन में पुनः दूसरे ठेकेदार को मरम्मत का कार्य सौंपा गया और लाखों रुपये के भुगतान किए गए। आरोपों के केंद्र में सहायक यंत्री दीपक सरेयाम एवं ठेकेदार असलम खान का नाम भी लिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर छात्र
आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा की मौजूदा स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। भवन कई स्थानों से क्षतिग्रस्त दिखाई देता है और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि छात्र आज भी असुरक्षित वातावरण में अध्ययन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि मरम्मत पर बार-बार राशि खर्च होने के बावजूद बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

शिकायतकर्ता योगेश राय ने सहायक यंत्री दीपक सरेयाम एंव ठेकेदार पर लगाए गंभीर आरोप

नए भवन का टेंडर होने के बाद भी पुराने भवन पर खर्च?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आश्रम के नए भवन का टेंडर पहले ही हो चुका है और निर्माण कार्य शुरू होने की तैयारी है। ऐसे में पुराने जर्जर भवन पर लगातार मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की आवश्यकता और औचित्य पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में पिछले दो वर्षों के सभी मरम्मत कार्यों, भुगतान, माप पुस्तिका (एमबी), कार्य आदेश, बिल-वाउचर और गुणवत्ता का स्वतंत्र तकनीकी दल से भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
(नोट: इस समाचार में वर्णित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)