Home CITY NEWS आदिवासी अंचल के स्कूल शिक्षक विहीन, जिला मुख्यालय में अटैचमेंट का खेल!

आदिवासी अंचल के स्कूल शिक्षक विहीन, जिला मुख्यालय में अटैचमेंट का खेल!

आदिवासी अंचल के स्कूल शिक्षक विहीन, जिला मुख्यालय में अटैचमेंट का खेल!

चिलक में फर्जी अतिथि शिक्षक की शिकायत से मचा हड़कंप, जबलपुर उपायुक्त ने दिए जांच के आदेश; कहा— दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, अटैचमेंट खत्म कर स्कूलों में भेजे जाएंगे शिक्षक

रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर आदिवासी अंचलों के कई सरकारी स्कूल शिक्षक विहीन होकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय, आश्रम शालाओं और कार्यालयों में वर्षों से शिक्षक-शिक्षिकाओं के अटैचमेंट का खेल जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।


मंगलवार को जबलपुर संभाग के उपायुक्त एन.एस. बरकडे के छिंदवाड़ा दौरे के दौरान ग्राम चिलक के ग्रामीणों ने सीधे उनसे मुलाकात कर गंभीर शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के स्कूल में नियमित शिक्षक नहीं हैं और जिन अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति दिखाई गई है, वे भी स्कूल नहीं आते। आरोप लगाया गया कि फर्जी तरीके से अतिथि शिक्षक दर्शाकर वेतन का भुगतान किया जा रहा है, जबकि कई शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

एन.एस.बरकडे उपायुक्त जनजातीय विभाग जबलपुर
संभागीय स्तर पर बनेगी जांच टीम
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त एन.एस. बरकडे ने कहा कि पूरे मामले की संभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी। इसके लिए विशेष जांच दल गठित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अटैचमेंट पर भी सख्त रुख
उपायुक्त ने जिला मुख्यालय, आश्रम शालाओं एवं कन्या शिक्षा परिसरों में वर्षों से अटैचमेंट या अधिशेष के नाम पर पदस्थ शिक्षक-शिक्षिकाओं की शिकायतों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों की जांच कराई जाएगी और जहां भी अनियमित अटैचमेंट पाया जाएगा, संबंधित शिक्षक-शिक्षिकाओं को तत्काल मूल विद्यालय में वापस भेजा जाएगा, ताकि शिक्षक विहीन स्कूलों में पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सके।
ग्रामीणों की मांग— बच्चों को मिले नियमित शिक्षक
ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे लंबे समय से शिक्षकों की कमी का खामियाजा भुगत रहे हैं। कई स्कूलों में नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि फर्जी नियुक्तियों और अटैचमेंट की व्यवस्था समाप्त कर वास्तविक आवश्यकता वाले स्कूलों में तत्काल शिक्षकों की पदस्थापना की जाए।
अब सभी की निगाहें संभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो जनजातीय कार्य विभाग में वर्षों से चल रहे अटैचमेंट और फर्जी नियुक्तियों के मामलों से पर्दा उठ सकता है।