8 सरकारी शिक्षक… फिर भी 22 में सिर्फ 2 छात्र पास! आखिर आदिवासी बच्चों का भविष्य बर्बाद करने का जिम्मेदार कौन?
तामिया के खिरेटी माल विद्यालय का चौंकाने वाला परीक्षा परिणाम, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…
विशेष रिपोर्ट-रामकुमार राजपूत
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तामिया/छिंदवाड़ा। आदिवासी अंचल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों की पोल एक बार फिर बोर्ड परीक्षा परिणाम ने खोल दी है। तामिया विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खिरेटी माल में कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। विद्यालय से कुल 22 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन सिर्फ 2 छात्र ही उत्तीर्ण हो सके, जबकि 20 विद्यार्थी असफल रहे।सबसे हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में 8 स्थायी सरकारी शिक्षक पदस्थ हैं। पर्याप्त शिक्षकीय स्टाफ होने के बावजूद इतना खराब परिणाम कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई होती, तो बच्चों का परिणाम इतना खराब नहीं आता।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है। करोड़ों रुपये शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ), सहायक संचालक (शिक्षा ) जनजाति विभाग एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और परीक्षा परिणाम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि आखिर इतने शिक्षक होने के बावजूद विद्यार्थियों का प्रदर्शन इतना कमजोर क्यों रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शिक्षकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आदिवासी अंचल के बच्चों का भविष्य लगातार प्रभावित होता रहेगा।
ग्रामीण जनता के सवाल…
8 सरकारी शिक्षक होने के बावजूद परिणाम इतना खराब क्यों?
क्या विद्यालय में नियमित पढ़ाई हो रही थी?
शिक्षा विभाग द्वारा निगरानी और मूल्यांकन क्यों नहीं हुआ?
आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
प्राचार्य पर लगे कई गंभीर आरोप…
तामिया विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल खिरेटी मॉल एक बार फिर विवादों में है। ग्रामीणों, अभिभावकों एवं शिकायतकर्ताओं ने विद्यालय के प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्राचार्य ने स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC/SMC) की स्वीकृति के बिना अपनी मनमर्जी से अतिथि शिक्षकों को कार्य पर रखा है, जो नियमानुसार नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में कई बार सहायक आयुक्त ,बीईओ एवं अन्य उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्राचार्य का विद्यालय में आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। वे अपनी सुविधा के अनुसार स्कूल आते-जाते हैं, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब इस संबंध में प्राचार्य से चर्चा की जाती है, तो वे उनकी बात सुनने के बजाय अनदेखी करते हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया, समिति की स्वीकृति तथा विद्यालय में प्राचार्य की उपस्थिति से जुड़े अभिलेखों की जांच की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
बीईओ तामिया का पक्ष:
इस मामले में बीईओ तामिया का कहना है कि मेरे द्वारा प्राचार्य
को समझाया गया है । लेकिन वो लापरवाही करने से नहीं चूक रहे हैं , और मुझे ही कहते हैं कि आप मेरी शिकायत उच्च अधिकारी को कर दीजिए, मेरा कुछ नहीं होगा, जब ऐसे प्राचार्य विकासखंड शिक्षा अधिकारी की बात नहीं सुन रहे हैं तो आम जनता की तो छोड़ो इसी का परिणाम है कि आज यहां के बच्चों शिक्षा के लिए तरस रहे हैं , जिसके कारण आदिवासी के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है
प्राचार्य का पक्ष..
स्कूल प्राचार्य का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।








